सूरजपुर | सूरजपुर जिले के रामानुजनगर विकासखंड स्थित गणेशपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) के बंद गेट पर प्रसव होने और नवजात की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि वे प्रसव पीड़ा से परेशान गर्भवती महिला को रात करीब 11 बजे अस्पताल लेकर पहुंचे थे, लेकिन मुख्य गेट पर ताला लगा हुआ था और मौके पर स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं थे।
परिजन दरवाजा पीटते रहे और मदद के लिए आवाज लगाते रहे, लेकिन समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिल सकी। इसी बीच अस्पताल के गेट के सामने ही महिला का प्रसव हो गया।
जन्म के बाद नवजात की मौत हो गई, जबकि महिला की हालत गंभीर बताई गई है। मामले में स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी राजेश पटेल और स्टाफ नर्स प्रमिला गिरी को निलंबित कर दिया है।
रात 11 बजे गर्भवती महिला को लेकर अस्पताल पहुंचे थे परिजनयह मामला सूरजपुर जिले के रामानुजनगर विकासखंड अंतर्गत गणेशपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का है।
जानकारी के अनुसार, पवनपुर तलवापारा की रहने वाली गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिजन रात करीब 11 बजे अस्पताल लेकर पहुंचे थे।
परिजनों को उम्मीद थी कि स्वास्थ्य केंद्र में महिला को तत्काल चिकित्सा सहायता मिलेगी और सुरक्षित प्रसव कराया जा सकेगा। लेकिन अस्पताल पहुंचने पर मुख्य गेट पर ताला लगा हुआ था। परिजनों के मुताबिक, उस समय मौके पर कोई स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं था।
महिला की प्रसव पीड़ा बढ़ने पर परिजनों ने दरवाजा पीटकर और आवाज लगाकर मदद मांगने की कोशिश की, लेकिन उन्हें तत्काल सहायता नहीं मिल सकी। इसके बाद अस्पताल के मुख्य गेट के सामने ही महिला का प्रसव हो गया।
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गेट पर प्रसव के बाद नवजात की मौत
प्रसव के बाद नवजात की मौत हो गई, जिससे परिवार में शोक फैल गया। महिला की हालत भी गंभीर बताई गई।
इसके बाद परिजन उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), रामानुजनगर लेकर पहुंचे, जहां उसे चिकित्सा सहायता दिलाने की कोशिश की गई।घटना के बाद ग्रामीण क्षेत्र में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और रात के समय स्वास्थ्यकर्मियों की ड्यूटी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
जिस स्वास्थ्य केंद्र में महिला को प्रसव के दौरान चिकित्सा सहायता मिलनी चाहिए थी, उसी के बाहर प्रसव होने की घटना ने स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों ने अस्पताल के बाहर किया प्रदर्शन
नवजात की मौत की जानकारी सामने आने के बाद परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। आक्रोशित लोगों ने गणेशपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
ग्रामीणों ने अस्पताल में स्वास्थ्यकर्मियों की अनुपस्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रसव जैसी आपातकालीन स्थिति में समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए।
घटना के बाद स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था, रात्रिकालीन ड्यूटी और आपात स्थिति में मरीजों को तत्काल इलाज उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
प्रभारी और स्टाफ नर्स को किया निलंबित
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने गणेशपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी राजेश पटेल और स्टाफ नर्स प्रमिला गिरी को निलंबित कर दिया है। दोनों के निलंबन का आदेश जारी होने की जानकारी सामने आई है।

यह कार्रवाई स्वास्थ्य केंद्र में समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने और कर्मचारियों की मौजूदगी को लेकर उठे सवालों के बीच की गई है।
अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि घटना की रात अस्पताल का गेट बंद क्यों था, संबंधित कर्मचारियों की ड्यूटी क्या थी और प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को तत्काल चिकित्सा सहायता क्यों नहीं मिल सकी।
सूरजपुर के ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल
गणेशपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ग्रामीण आबादी के लिए चिकित्सा सुविधा का महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं।
गर्भवती महिलाओं के प्रसव और अन्य आपात स्थितियों में समय पर चिकित्सा सहायता मिलना बेहद जरूरी है।ऐसी परिस्थितियों में स्वास्थ्य केंद्र का संचालन, ड्यूटी पर कर्मचारियों की उपलब्धता और जरूरत पड़ने पर मरीजों को उच्च स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने की व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है।