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खारुन मंथन

किसी भी जीवंत लोकतंत्र और जागरूक समाज की बुनियाद उसकी वैचारिक स्पष्टता पर टिकी होती है। ‘खारुन मंथन’ इसी बौद्धिक विमर्श को समर्पित ‘खारुन टाइम्स’ का वैचारिक स्तंभ है।
इसके माध्यम से हम राष्ट्र और प्रदेश के दूरगामी हितों, नीतिगत निर्णयों, सामाजिक बदलावों और समकालीन चुनौतियों पर एक स्पष्ट संपादकीय विवेक प्रस्तुत करते हैं।
यहाँ प्रकाशित होने वाले आलेख पाठकों को केवल सूचना नहीं देते, बल्कि उन्हें सोचने, विश्लेषण करने और अपनी स्वतंत्र राय बनाने की दिशा प्रदान करते हैं।

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भारत में आरक्षण की जरूरत, क्रीमी लेयर, जातिगत जनगणना, सामान्य वर्ग की चिंता और आरक्षण के सामाजिक प्रभाव पर विस्तृत विश्लेषण पढ़ें।
खारुन मंथन 27 August 2026

भारत में आरक्षण: जरूरत या सामाजिक विभाजन?

आरक्षण: अधिकार, आवश्यकता या अब बदलाव का समय? जंतर-मंतर के आंदोलन से उठे सवालों के बीच संविधान, क्रीमी लेयर, जातिगत जनगणना और ‘सामान्य वर्ग’ की बेचैनी…
बस्तर में नक्सलवाद का बदलता परिदृश्य: सुरक्षा, विकास और पुनर्वास
खारुन मंथन 31 July 2026

बस्तर: सुरक्षा से विकास तक, क्या स्थायी शांति की राह बन चुकी है?

बस्तर : चार दशकों तक नक्सली हिंसा, अविकास और प्रशासनिक उपेक्षा का प्रतीक रहा बस्तर आज परिवर्तन के एक निर्णायक दौर से गुजर रहा है। सुरक्षा…
29 जुलाई 1904 को जन्मे जे.आर.डी. टाटा ने भारतीय नागरिक उड्डयन, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और उद्योग जगत को नई दिशा दी। जानिए उनके जीवन, उपलब्धियों और आधुनिक भारत के निर्माण में योगदान के बारे में।
खारुन मंथन 29 July 2026

आधुनिक भारत के शिल्पकार: जे.आर.डी. टाटा का दूरदर्शी नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण

आधुनिक भारत के शिल्पकार: जे.आर.डी. टाटा – 29 जुलाई 1904 को पेरिस में जन्मे जहांगीर रतनजी दादाभाई (जे.आर.डी.) टाटा केवल एक सफल उद्योगपति नहीं थे, बल्कि…
कॉकरोच आंदोलन से बदले देश के राजनीतिक समीकरण, सरकार पर बढ़ा दबाव
खारुन मंथन 28 July 2026

कॉकरोच आंदोलन से बदले देश के राजनीतिक समीकरण, सरकार पर बढ़ा दबाव

विश्लेषण | नीरजा चौधरी :- कॉकरोच आंदोलन का आगामी चुनावों और भारतीय राजनीति पर कितना गहरा असर पड़ेगा, इसका सटीक आकलन करना फिलहाल जल्दबाजी होगी। लेकिन…