रायपुर। गणेशोत्सव की तैयारियों के बीच राजधानी रायपुर में भगवान गणेश की प्रतिमाओं के स्वरूप को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।
माना कैंप समेत शहर के अलग-अलग इलाकों में गणेश प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं।
इसी दौरान एक ऐसी प्रतिमा सामने आई है, जिसमें भगवान गणेश को सिक्स पैक्स और फिट बॉडी के साथ दिखाया गया है।
प्रतिमा का यह स्वरूप सामने आने के बाद हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई है।
उनका कहना है कि भगवान गणेश की प्रतिमा बनाते समय धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक स्वरूप का ध्यान रखा जाना चाहिए।
संगठनों ने मूर्तिकारों से भी अपील की है कि बप्पा की प्रतिमाओं में अनावश्यक बदलाव न किए जाएं।
फिटनेस लुक में दिखे गणेशजी, यहीं से शुरू हुआ विवाद
माना कैंप के मूर्तिकला केंद्र में तैयार हो रही प्रतिमाओं के बीच सिक्स पैक्स वाली गणेश प्रतिमा चर्चा में आई।
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आमतौर पर भगवान गणेश का पारंपरिक स्वरूप बड़े उदर, शांत भाव और धार्मिक प्रतीकों के साथ दिखाया जाता है।
इसके उलट इस प्रतिमा में उन्हें एक फिटनेस आइकन की तरह दिखाने की कोशिश की गई है।
यही बदलाव अब विवाद की वजह बन गया है।
विरोध करने वालों का तर्क है कि गणेशजी केवल एक कलात्मक पात्र नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं।
इसलिए प्रतिमा में प्रयोग करते समय धार्मिक मर्यादा का ध्यान रखना जरूरी है।
पिछले साल AI गणेश प्रतिमाओं पर भी हुआ था विवाद
रायपुर में यह पहली बार नहीं है जब गणेश प्रतिमाओं के बदले हुए स्वरूप को लेकर विवाद सामने आया हो।
पिछले वर्ष AI आधारित गणेश प्रतिमाओं को लेकर भी विवाद हुआ था।
मामला इतना बढ़ा कि FIR तक दर्ज हुई थी।
इसके बाद प्रशासन की ओर से प्रतिमा निर्माण को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए थे।
लेकिन इस बार फिर कुछ प्रतिमाओं में पारंपरिक स्वरूप से बदलाव देखने को मिल रहा है।
हिंदू संगठनों का सवाल है कि जब प्रशासन ने गाइडलाइन जारी की है तो उसके पालन की निगरानी भी होनी चाहिए।
हिंदू संगठनों ने पहले ही मूर्तिकारों से की थी अपील
रिपोर्ट के मुताबिक, गणेशोत्सव की तैयारियां शुरू होने के साथ ही हिंदू संगठनों से जुड़े प्रतिनिधि मूर्तिकारों की कार्यशालाओं तक पहुंचे थे।
उन्होंने गणेश और दुर्गा की प्रतिमाएं पारंपरिक स्वरूप में तैयार करने का आग्रह किया था।
संगठनों की चिंता सिर्फ इस साल के आयोजन तक सीमित नहीं है।
उनका कहना है कि आने वाली पीढ़ियां अपने देवी-देवताओं के मूल स्वरूप को उसी तरह पहचानें,
इसलिए AI या दूसरी आधुनिक तकनीकों के जरिए धार्मिक प्रतिमाओं के स्वरूप में बदलाव करने से बचना चाहिए।
मूर्तिकारों के पास 3 से 10 फीट तक की प्रतिमाओं के ऑर्डर
गणेशोत्सव को लेकर मूर्तिकारों के पास अलग-अलग आकार की प्रतिमाओं की मांग है।
रिपोर्ट के अनुसार 3, 5, 7 और 10 फीट तक की गणेश प्रतिमाएं सबसे ज्यादा पसंद की जा रही हैं।
कई प्रतिमाओं का ढांचा लगभग तैयार हो चुका है।
अब इनमें रंग-रोगन और सजावट का काम बाकी है।
वहीं कुछ मूर्तिकारों ने AI आधारित डिजाइन की प्रतिमाएं बनाने से साफ इनकार कर दिया है,
और पारंपरिक स्वरूप में ही प्रतिमाएं तैयार करने की बात कही है।
कुछ मूर्तिकार बोले- हर चीज में AI जरूरी नहीं
इस विवाद के बीच मूर्तिकारों की राय भी सामने आई है।
कुछ कलाकारों का मानना है कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल दूसरी कलाकृतियों और पात्रों के निर्माण में किया जा सकता है,
लेकिन देवी-देवताओं की प्रतिमाओं में धार्मिक मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए।
यानी तकनीक के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने की बात नहीं है,
बल्कि धार्मिक प्रतिमाओं के मामले में उसकी सीमा तय करने की जरूरत बताई जा रही है।
मूर्तिकारों का कहना है कि अगर ग्राहक किसी अन्य पात्र या सजावटी कलाकृति का AI आधारित डिजाइन चाहता है तो उसे बनाया जा सकता है,
लेकिन भगवान गणेश की प्रतिमा पारंपरिक स्वरूप में रखना ज्यादा उचित है।
प्रशासन की निगरानी पर भी उठे सवाल
विवाद का एक अहम पहलू प्रशासन की भूमिका को लेकर भी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रतिमा निर्माण को लेकर दिशा-निर्देश जारी होने के बावजूद
यह देखने के लिए पर्याप्त निगरानी नहीं हो रही कि उनका पालन हो रहा है या नहीं।
हिंदू संगठनों का कहना है कि विवाद बढ़ने के बाद कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन को पहले ही मूर्ति निर्माण स्थलों पर स्थिति की निगरानी करनी चाहिए।
इससे धार्मिक भावनाओं से जुड़े विवादों को समय रहते रोका जा सकता है।
कार्रवाई नहीं हुई तो सड़क पर उतरने की चेतावनी
मामला आगे बढ़ने के साथ संत समाज और हिंदू संगठनों का विरोध भी तेज हुआ है।
8 सितंबर की एक रिपोर्ट के अनुसार संत समाज और हिंदू संगठनों ने प्रशासन से पहले जारी निर्देशों का कड़ाई से पालन कराने और मूल स्वरूप से छेड़छाड़ करने वालों पर कार्रवाई की मांग की है।
कार्रवाई नहीं होने पर सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी भी दी गई है।
अब असली सवाल यही है…
गणेशोत्सव में हर साल नई थीम और नई कलात्मकता देखने को मिलती है।
लेकिन रायपुर में सामने आया यह मामला एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है,
नई डिजाइन और रचनात्मकता की सीमा कहां तक होनी चाहिए ?
खासकर तब जब बात किसी पूजनीय देवी-देवता की प्रतिमा की हो..
फिलहाल हिंदू संगठन पारंपरिक स्वरूप बनाए रखने की मांग पर कायम हैं।
वहीं प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि धार्मिक आस्था से जुड़े दिशा-निर्देशों का पालन भी हो
और गणेशोत्सव के दौरान किसी तरह का विवाद भी न बढ़े।