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महंगाई का दूसरा दौर: अब सिर्फ सब्जी-पेट्रोल नहीं, पूरी जेब पर पड़ेगा असर !

25 October 2026
KharunTimes

महंगाई का “दूसरा दौर” तब शुरू होता है जब किसी एक चीज़ की कीमत बढ़ने का असर धीरे-धीरे पूरी अर्थव्यवस्था में फैल जाए। जैसे प्याज, सब्जी या पेट्रोल महंगा होने के बाद सिर्फ वही चीज़ महंगी न रहे, बल्कि रिक्शा, रेस्तराँ का खाना, सब्जी की डिलीवरी और रोज़ की दूसरी चीज़ों की कीमतें भी बढ़ने लगें।

इसे आसान भाषा में समझें

मान लीजिए टमाटर महंगा हो जाता है। यह पहला असर है। अब ढाबे वाला कहता है, “टमाटर महंगा हुआ है, इसलिए सब्जी और पराठे के दाम बढ़ाने पड़ेंगे।”

रिक्शा चालक कहता है, “पेट्रोल महंगा है, किराया बढ़ेगा।” लोग यह सोचने लगते हैं कि आगे और महंगाई बढ़ेगी, इसलिए वे जल्दी सामान खरीद लेते हैं। यही दूसरा दौर है।

भारत में अभी क्या हो रहा है ?

भारत में सितंबर 2026 में महंगाई दर 5.54% तक पहुँच गई। इसका मुख्य कारण प्याज और खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ना रहा।

RBI की चिंता यह है कि खाद्य महंगाई अब केवल कुछ चीज़ों तक सीमित नहीं रह रही। अगस्त में खाद्य और पेय पदार्थों की महंगाई 5.9% थी, और CPI टोकरी की लगभग 37% वस्तुओं में महंगाई 4% से ऊपर थी। इसका मतलब है कि महंगाई धीरे-धीरे फैल रही है।

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आंकड़े चेतावनी दे रहे हैं –

सितंबर 2026 में CPI महंगाई 5.54% तक पहुँच गई, जो RBI की 2–6% सीमा के ऊपरी छोर के पास है। अगस्त में खाद्य एवं पेय महंगाई 5.9% थी और CPI टोकरी की लगभग 37% वस्तुओं में महंगाई 4% से ऊपर थी।

RBI के सर्वेक्षण में तीन महीने आगे की महंगाई अपेक्षा 70 बेसिस पॉइंट बढ़कर 9.9% हो गई है। जब लोग महंगाई को स्थायी मानने लगते हैं, तो कीमतें और तेजी से बढ़ती हैं यही दूसरे दौर का सबसे स्पष्ट संकेत है।

विशेषज्ञों की राय –

  • संजय मल्होत्रा, RBI गवर्नर: उन्होंने कहा कि आगे ब्याज दर वृद्धि की गति और अवधि underlying inflation, कीमतों के दबाव के फैलाव, आपूर्ति-झटके के दूसरे दौर के प्रभाव और मांग पर निर्भर करेगी।
  • सौगात भट्टाचार्य, RBI MPC सदस्य: उनका कहना है कि कीमती दबाव “entrenched” हो रहे हैं; थोक इनपुट कीमतें लगभग 9% बढ़ी हैं और उच्च लागत उपभोक्ताओं तक पहुँच रही है।
  • पूनम गुप्ता, RBI उप-गवर्नर: उनका मानना है कि महंगाई मुख्य रूप से बाहरी आपूर्ति-झटकों से चल रही है और अभी स्थायी होने के सीमित संकेत हैं, लेकिन नीति के प्रभाव में देरी होने के कारण MPC को दूसरे दौर के पूरे सबूत का इंतजार नहीं करना चाहिए।
  • नागेश कुमार, RBI MPC सदस्य: उन्होंने कहा कि कम मानसून, बढ़ते कच्चे तेल के दाम, ऊँचे कीमती धातुओं के भाव और रुपये की कमजोरी के कारण 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाया गया है।
  • राम सिंह, RBI MPC सदस्य: उनकी चिंता है कि बड़ी दर वृद्धि की अपेक्षाएँ वाहन, रियल एस्टेट और विवेकाधीन खर्चों जैसे क्षेत्रों की मांग को कम कर सकती हैं और निजी निवेश पर भी असर डाल सकती हैं।
  • इंद्रनील भट्टाचार्य, RBI MPC सदस्य: उनका कहना है कि “cautiousness bias” छोड़कर इस समय पहले से सतर्क कार्रवाई करना बेहतर है, न कि देखते रहना।
  • सोनल वर्मा, Nomura की अर्थशास्त्री: उनका तर्क है कि अभी दूसरे दौर के स्पष्ट संकेत नहीं हैं, घरेलू महंगाई अपेक्षाएँ लगभग 5% के स्तर पर हैं और ग्रामीण-शहरी मजदूरी में दूसरे दौर के संकेत नहीं दिख रहे।

दूसरा दौर क्यों खतरनाक है ?

  • लोगों को लगने लगता है कि महंगाई लंबे समय तक रहेगी।
  • कंपनियाँ अपने खर्च बढ़ने पर तुरंत दाम बढ़ा देती हैं।
  • मजदूरी, किराया और सेवाओं की कीमतें भी बढ़ने लगती हैं।
  • एक बार यह चक्र शुरू हो जाए तो उसे तोड़ना मुश्किल हो जाता है।

सरकार और RBI क्या कर सकते हैं ?

  • खाद्य आपूर्ति बढ़ाना: सरकार बफर स्टॉक रिलीज, आयात या स्टॉक लिमिट से कीमतें थोड़ी नियंत्रित कर सकती है।
  • किसानों की मदद: रबी बुवाई, सिंचाई, बीज और मौसम संबंधी सहायता से आपूर्ति बेहतर हो सकती है।
  • ब्याज दर बढ़ाना: RBI इससे मांग को थोड़ा कम करता है ताकि कीमतें और तेजी से न बढ़ें।
  • गरीबों के लिए सहायता: राशन, खाद्य सहायता या नकद ट्रांसफर से महंगाई का असर कम किया जा सकता है।

RBI ने अक्टूबर 2026 में repo rate 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% कर दिया और रुख को “calibrated tightening” किया। MPC के छहों सदस्यों ने दर वृद्धि का समर्थन किया, लेकिन नागेश कुमार और राम सिंह ने neutral से calibrated tightening में बदलाव का विरोध किया

सरकार को क्या करना चाहिए ?

सरकार को केवल कीमत नियंत्रण तक सीमित न रहकर आपूर्ति पक्ष पर ध्यान देना चाहिए। बफर स्टॉक रिलीज, आयात, स्टॉक लिमिट और आपूर्ति श्रृंखला सुधार से अल्पकालिक राहत मिल सकती है, लेकिन असली समाधान रबी बुवाई, सिंचाई, बीज और मौसम जोखिम प्रबंधन में निवेश है।

साथ ही, गरीब और मध्यम वर्ग पर महंगाई का सीधा असर पड़ता है। इसलिए लक्षित राशन, खाद्य सहायता या नकद ट्रांसफर जैसे कदम भी आवश्यक हैं।

अभी महंगाई का दूसरा दौर पूरी तरह शुरू नहीं हुआ है, लेकिन उसके संकेत साफ दिख रहे हैं। इसीलिए RBI ने ब्याज दर बढ़ाकर और सख्त रुख अपनाकर कहा है कि अगले कुछ महीनों में महंगाई रोकना आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने से ज्यादा जरूरी होगा।

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Laxya Sahu
About the author

Laxya Sahu

लक्ष्य साहू मूलतः नया रायपुर के अभनपुर के निवासी हैं। वे खारुन टाइम्स के प्रधान संपादक हैं तथा सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर लेखन करते हैं । उनकी कृति "चार समाज की बात" समकालीन सामाजिक सरोकारों पर आधारित है । छात्र जीवन से ही वे सामाजिक एवं छात्र हित के मुद्दों से जुड़े रहे हैं , इस दौरान उन्होंने अनेक छात्र एवं जनहित संबंधी आंदोलनों को खड़ा कर उनका नेतृत्व किया तथा लगभग आठ वर्षों तक विद्यार्थियों के विकास के उद्देश्य से शैक्षणिक, सामाजिक और नेतृत्व विकास कार्यक्रमों का आयोजन एवं संचालन किया। वर्तमान में वे पत्रकारिता और साहित्य के माध्यम से सामाजिक, राजनीतिक और जनसरोकारों से जुड़े विषयों पर नियमित कार्य कर रहे हैं।

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