छत्तीसगढ़ सरकार खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए 15 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक धान खरीदी करेगी। इस बार ₹3,100 प्रति क्विंटल की दर से कुल 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा गया है, जो पिछले साल की तुलना में 20 लाख मीट्रिक टन अधिक है।
मुख्यमंत्री की घोषणा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दुर्ग में आयोजित पंडवानी महासम्मेलन के दौरान धान खरीदी की तारीखों की आधिकारिक घोषणा की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार किसानों से ₹3,100 प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर धान खरीदेगी और खरीदी 31 जनवरी 2027 तक जारी रहेगी।
सरकार का उद्देश्य किसानों को समय पर न्यायसंगत दाम देना और उपार्जन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है। भुगतान किसानों के बैंक खातों में सीधे ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए किए जाने की बात कही गई है।
धान खरीदी के मुख्य नियम
- दर: ₹3,100 प्रति क्विंटल।
- अवधि: 15 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक।
- सीमा: पंजीकृत किसान प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल धान बेच सकेंगे।
- पंजीयन: धान बेचने के लिए एग्रीस्टैक पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीयन अनिवार्य होगा।
- सत्यापन: खरीदी केंद्र पर टोकन और बायोमेट्रिक सत्यापन भी आवश्यक होगा।
- गुणवत्ता: धान में नमी 17 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए; इससे अधिक नमी होने पर खेप रिजेक्ट हो सकती है।
प्रति एकड़ 21 क्विंटल की सीमा पर धान बेचने वाले किसान को ₹3,100 की दर से कुल ₹65,100 का भुगतान होगा।
5 साल में 63% की बढ़ोतरी
इस सीजन का लक्ष्य पिछले वर्ष के 140 लाख मीट्रिक टन की तुलना में 20 लाख मीट्रिक टन बढ़ाया गया है। वर्ष 2021-22 में लक्ष्य 98 लाख मीट्रिक टन था, जिसके मुकाबले अब यह 62 लाख मीट्रिक टन बढ़कर 160 लाख मीट्रिक टन हो गया है यानी लगभग 63 प्रतिशत की वृद्धि।
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पिछले पांच वर्षों में धान खरीदी के लक्ष्य में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2021-22 में लक्ष्य 98 लाख मीट्रिक टन था, जबकि 2025-26 में यह 140 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया था। अब 2026-27 के लिए 160 लाख मीट्रिक टन का नया लक्ष्य रखा गया है।
किसानों के लिए जरूरी तैयारी
किसानों को खरीदी शुरू होने से पहले एग्रीस्टैक पर पंजीयन पूरा करना, आवंटित टोकन की जानकारी रखना और धान को सुखाकर व साफ करके केंद्र पर लाना होगा। प्रशासन ने नमी के मानक का पालन सुनिश्चित करने को कहा है, ताकि खरीदी के दौरान उपज अस्वीकृत न हो।
राज्य सरकार का कहना है कि उपार्जन केंद्रों पर धान आते ही निर्धारित दर पर भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहयोग मिलने और किसानों की आय सुदृढ़ होने की उम्मीद जताई जा रही है।