छत्तीसगढ़ में CM हेल्पलाइन की शिकायतों के निराकरण में लापरवाही
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के निराकरण में लापरवाही को लेकर लोक निर्माण विभाग (PWD) ने सख्त रुख अपनाया है।
विभागीय समीक्षा के बाद 13 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। संबंधित अधिकारियों को नोटिस प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर लिखित जवाब देना होगा।
मामला मुख्यमंत्री हेल्पलाइन-1076 पर दर्ज शिकायतों को पर्याप्त जानकारी और स्पष्ट निराकरण दर्ज किए बिना बंद करने से जुड़ा है।
विभाग ने अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगते हुए जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू की है।
अगस्त-सितंबर की शिकायतों की समीक्षा में सामने आया मामला
विभाग ने अगस्त और सितंबर 2026 के दौरान दर्ज शिकायतों की समीक्षा की। इस दौरान शिकायतों को एल-1, एल-2 और एल-3 स्तर पर बंद करने की प्रक्रिया में कमियां सामने आईं।
कुछ मामलों में शिकायत बंद करने के साथ दर्ज टिप्पणियों से यह स्पष्ट नहीं हो रहा था कि संबंधित समस्या का वास्तविक समाधान कैसे किया गया।
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें
छत्तीसगढ़ की ब्रेकिंग न्यूज़, ग्राउंड रिपोर्ट और महत्वपूर्ण अपडेट सबसे पहले सीधे अपने WhatsApp पर प्राप्त करें।
शिकायत को पोर्टल पर बंद कर देना ही उसका निराकरण नहीं माना जा सकता। अधिकारियों को की गई कार्रवाई, स्थल निरीक्षण और समस्या के समाधान से जुड़ी जानकारी स्पष्ट रूप से दर्ज करनी होती है।
ऐसा नहीं होने पर शिकायत के वास्तविक निराकरण की पुष्टि करना मुश्किल हो जाता है।
तीन अधीक्षण अभियंता समेत 13 अधिकारियों को नोटिस
कारण बताओ नोटिस पाने वाले अधिकारियों में तीन अधीक्षण अभियंता, पांच कार्यपालन अभियंता और पांच अनुविभागीय अधिकारी शामिल हैं।
नोटिस पाने वाले अधिकारियों में रायपुर मंडल क्रमांक-2 के अधीक्षण अभियंता डी.के. नेताम, दुर्ग मंडल की अधीक्षण अभियंता अर्पणा चौरपगार और राष्ट्रीय राजमार्ग मंडल, बिलासपुर के अधीक्षण अभियंता महादेव लहरे के नाम भी शामिल हैं।
विभागीय कार्रवाई का उद्देश्य शिकायतों के निराकरण में जिम्मेदारी तय करना और यह सुनिश्चित करना है कि नागरिकों की समस्याओं को केवल पोर्टल पर बंद करने के बजाय उनका वास्तविक समाधान किया जाए।
शिकायतों का निराकरण करते समय किन बातों का ध्यान रखना होगा?
शिकायतों को बंद करते समय अधिकारियों को कार्रवाई से संबंधित जरूरी जानकारी स्पष्ट रूप से दर्ज करनी होगी। इसमें प्रमुख रूप से निम्न बिंदु शामिल हैं:
- स्थल निरीक्षण: शिकायत से संबंधित स्थान का निरीक्षण किया गया या नहीं और उसमें क्या सामने आया।
- कार्रवाई का विवरण: समस्या के समाधान के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए।
- समाधान की स्थिति: शिकायत का निराकरण हुआ है या अभी कार्रवाई बाकी है।
- समय-सीमा: समस्या के समाधान के लिए क्या समय-सीमा तय की गई है।
- शिकायतकर्ता को सूचना: संबंधित व्यक्ति को कार्रवाई की जानकारी दी गई या नहीं।
- दूसरे विभाग से संबंधित मामला: शिकायत किसी अन्य विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है, तो इसका स्पष्ट उल्लेख किया जाए।
इन जानकारियों से शिकायत की स्थिति का आकलन करना और यह सुनिश्चित करना आसान होता है कि कार्रवाई वास्तव में हुई है।
15 दिन में देना होगा लिखित जवाब
लोक निर्माण विभाग ने संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है।
अधिकारियों को नोटिस प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर विभागीय सचिव के समक्ष लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना होगा।
यदि निर्धारित समय में जवाब नहीं दिया जाता है या स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि, नोटिस जारी होना अंतिम रूप से दोष सिद्ध होना नहीं है। आगे का निर्णय अधिकारियों के जवाब और विभागीय प्रक्रिया के आधार पर लिया जाएगा।
आम नागरिकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कार्रवाई?
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नागरिकों को सरकारी विभागों से जुड़ी समस्याएं दर्ज कराने का माध्यम उपलब्ध कराती है।
शिकायतों का सही तरीके से निराकरण होने से लोगों को सरकारी सेवाओं से जुड़ी परेशानियों का समाधान पाने में मदद मिलती है।
इस मामले में विभागीय कार्रवाई का मुख्य संदेश यह है कि शिकायत को पोर्टल पर बंद करना पर्याप्त नहीं है।
संबंधित अधिकारी को कार्रवाई का स्पष्ट रिकॉर्ड रखना और समस्या के वास्तविक समाधान की जिम्मेदारी निभानी होगी।
13 अधिकारियों को नोटिस जारी किए जाने से शिकायत निवारण प्रक्रिया में जवाबदेही का मुद्दा सामने आया है। अब संबंधित अधिकारियों के स्पष्टीकरण के बाद ही आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।