स्कूल भवन निर्माण में देरी से नाराज बच्चों ने जताई नाराजगी, ₹8.32 लाख की राशि स्वीकृत होने और 80% भुगतान के बाद भी अधूरा है निर्माण कार्य
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के ठेमली गांव के स्कूल भवन का निर्माण पूरा नहीं होने से परेशान विद्यार्थियों ने अपनी समस्या को सामने लाने के लिए लंबा सफर तय किया।
खबर के अनुसार, बच्चे तूफान के बीच करीब 15 किलोमीटर पैदल चलकर अपनी मांग रखने पहुंचे। विद्यार्थियों का कहना है कि जब तक स्कूल भवन का निर्माण पूरा नहीं कराया जाएगा, तब तक वे स्कूल नहीं आएंगे।
यह मामला सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और निर्माण कार्यों की समय पर पूर्णता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। बच्चों की मांग है
कि उन्हें पढ़ाई के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक स्कूल भवन उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनकी शिक्षा प्रभावित न हो।
₹8.32 लाख स्वीकृत, फिर भी अधूरा है भवन
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, स्कूल भवन के निर्माण के लिए ₹8.32 लाख की राशि स्वीकृत की गई थी। इसके बावजूद भवन का काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है।
खबर में यह भी बताया गया है कि निर्माण कार्य के लिए लगभग 80 प्रतिशत भुगतान किया जा चुका है, लेकिन भवन अधूरा है।
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ऐसी स्थिति में निर्माण कार्य की प्रगति, भुगतान और शेष काम को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि निर्माण में देरी की वास्तविक वजह क्या है और इसके लिए संबंधित स्तर पर किसकी जिम्मेदारी तय की गई है।
बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर
स्कूल भवन का निर्माण अधूरा रहने से विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाएं मिलने में परेशानी हो सकती है।
विद्यालय का सुरक्षित और व्यवस्थित भवन बच्चों की शिक्षा के लिए बुनियादी आवश्यकता है। ऐसे में निर्माण कार्य लंबे समय तक अधूरा रहने से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
बच्चों का अपनी मांग को लेकर आगे आना इस बात को दर्शाता है कि वे जल्द से जल्द स्कूल भवन का काम पूरा होते देखना चाहते हैं।
उनका स्पष्ट संदेश है कि भवन निर्माण पूरा कराया जाए, ताकि वे नियमित रूप से पढ़ाई कर सकें।
भुगतान के बाद अधूरे काम पर उठे सवाल
निर्माण कार्य के लिए राशि स्वीकृत होने और बड़ी मात्रा में भुगतान किए जाने के बावजूद भवन अधूरा रहने का मामला जांच और जवाबदेही की जरूरत को रेखांकित करता है।
संबंधित विभाग को निर्माण की वर्तमान स्थिति, शेष कार्य और उसे पूरा करने की समयसीमा स्पष्ट करनी चाहिए।
यदि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो,
इसके लिए आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
अब भवन पूरा होने का इंतजार
तूफान के बीच 15 किलोमीटर पैदल चलकर अपनी बात रखने वाले विद्यार्थियों की मांग है कि स्कूल भवन का निर्माण जल्द पूरा कराया जाए।
अब देखना होगा कि संबंधित विभाग और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और विद्यार्थियों को भवन की सुविधा कब तक मिल पाती है।
मुख्य सवाल यही है कि जब स्कूल भवन के लिए ₹8.32 लाख स्वीकृत हो चुके हैं और 80 प्रतिशत भुगतान भी किया जा चुका है,
तो निर्माण कार्य अब तक अधूरा क्यों है? बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस सवाल का जवाब देना और निर्माण कार्य पूरा कराना जरूरी है।