दुनियाभर में खाद्य पदार्थों के दाम एक बार फिर आम जनता और सरकारों की चिंता बढ़ाने लगे हैं।
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार,
अगस्त महीने में वैश्विक खाद्य मूल्य सूचकांक (Food Price Index) बढ़कर 133.3 अंक पर पहुंच गया है।
यह नवंबर 2022 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है।
लगातार जारी युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव और कई महाद्वीपों में खराब मौसम के कारण सप्लाई चेन प्रभावित होने से यह उछाल आया है।
FAO रिपोर्ट: शक्कर और अनाज के दामों में बड़ा उछाल
संयुक्त राष्ट्र (UN) की संस्था FAO द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अगस्त महीने में प्रमुख खाद्य वर्गों की कीमतों में तेजी दर्ज की गई:
शक्कर (Sugar): चीनी की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में सबसे बड़ा उछाल 11.9% का रहा।
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ब्राजील के मध्य-दक्षिण क्षेत्र में उत्पादन घटने और यूरोप व एशिया में मौसम की मार से गन्ने की फसल प्रभावित हुई है।
अनाज (Cereal): अनाज सूचकांक में 2.2% की बढ़ोतरी हुई, जो मई 2024 के बाद सबसे अधिक है।
डेयरी व खाद्य तेल: डेयरी उत्पादों के दाम में 2.3% और वेजिटेबल ऑयल में 0.6% का इजाफा दर्ज किया गया है।महंगाई बढ़ने के मुख्य कारण
FAO के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो (Maximo Torero) के अनुसार,
खाद्य बाजारों में फिर से जोखिम प्रीमियम बढ़ रहा है।
इसके 3 बड़े कारण हैं:

युद्ध और सप्लाई चेन में रुकावट:
काला सागर (Black Sea) क्षेत्र में बढ़ते हमलों के कारण रूस और यूक्रेन से अनाज का निर्यात बाधित हुआ है।
इसके अलावा मध्य पूर्व में जारी तनाव से उर्वरक (Fertilizer) की सप्लाई और शिपिंग भाड़ा प्रभावित हुआ है।
मौसम की मार और एल नीनो (El Niño):
यूरोप में भीषण गर्मी और सूखे ने मक्का व चुकंदर की फसल को नुकसान पहुंचाया है।
वहीं, एशिया में एल नीनो के डर से पाम ऑयल और शक्कर के उत्पादन पर संकट मंडरा रहा है।
उत्पादन अनुमान में कटौती:
FAO ने वर्ष 2026 के लिए वैश्विक अनाज उत्पादन के अनुमान में 34 लाख मीट्रिक टन की कटौती की है।
भारत और घरेलू बाजार पर असर :
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शक्कर और अनाज महंगे होने का असर भारतीय बाजारों पर भी देखने को मिल सकता है।
आगामी त्योंहारी सीजन (गणेशोत्सव, नवरात्रि और दीपावली) में मांग बढ़ने के कारण खाद्य पदार्थों की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
हालांकि, केंद्र सरकार ने घरेलू कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए थोक विक्रेताओं के लिए स्टॉक लिमिट और निर्यात पर कड़े नियम लागू किए हैं।