विश्लेषण | नीरजा चौधरी :- कॉकरोच आंदोलन का आगामी चुनावों और भारतीय राजनीति पर कितना गहरा असर पड़ेगा,
इसका सटीक आकलन करना फिलहाल जल्दबाजी होगी।
लेकिन इस आंदोलन के कारण जेन-जी (Gen-Z) युवाओं ने केंद्र सरकार को रक्षात्मक मुद्रा (बैकफुट) पर लाकर खड़ा कर दिया है।
इसके साथ ही, इस आंदोलन ने विपक्ष में भी एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया है।
परिसीमन विधेयक पर पुनर्विचार और विपक्षी दलों का रुख
आंदोलन के बढ़ते असर को देखते हुए सरकार ने संसद के आगामी मानसून सत्र में
परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) लाने की अपनी योजना पर पुनर्विचार शुरू कर दिया है।
पहले माना जा रहा था कि एनडीए (NDA) संसद में इसे पारित कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुँच चुका है।
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डीएमके (DMK) और एनसीपी (सपा) भी इस विधेयक का समर्थन करने के विकल्प खुले रखे हुए थे,
लेकिन अब उनका रुख पहले की तुलना में अधिक अनिश्चित और कड़ा दिखाई दे रहा है।
कॉकरोच पर पुलिस की कार्रवाई –
पश्चिम बंगाल में सफलता और कई क्षेत्रीय दलों में फूट के कारण जो राजनीतिक माहौल बीजेपी के पक्ष में बनता दिख रहा था,
उसमें आंदोलन के बाद नया मोड़ आ गया है।
रैपिड एक्शन फोर्स की आंतरिक रिपोर्ट: 20 जुलाई को मध्य दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज और बल प्रयोग में पुलिस की कार्रवाई में गंभीर कमियां पाई गईं।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: शीर्ष अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी की है कि किसी भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन से निपटने के लिए लाठीचार्ज को उचित नहीं ठहराया जा सकता।
“छात्रों के खिलाफ पुलिस की बर्बरता ने इस मुद्दे को देश के लगभग हर मध्यम-वर्गीय परिवार के ड्रॉइंग रूम तक पहुँचा दिया है।
वही शहरी मध्यम-वर्ग, जो लंबे समय से बीजेपी का मुख्य समर्थन आधार रहा है।
मध्यम-वर्गीय परिवारों का समर्थन-
परीक्षाओं में धांधली और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग अब देश के परिवारों के लिए एक भावनात्मक मुद्दा बन गई है।
अचानक मध्यम-वर्गीय माता-पिता अपने जेन-जी बच्चों के साहस, संवेदनशीलता और दृढ़ संकल्प पर गर्व महसूस कर रहे हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए भी शिक्षा ही गरीबी से निकलने का सबसे बड़ा साधन मानी जाती है।
सरकार द्वारा उठाए गए कदम –
राजनीतिक नुकसान की भरपाई और स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने कुछ बड़े कदम उठाए हैं:
1. विशेष टास्क फोर्स: नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में विशेष टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की गई है।
2. सख्त कानून की तैयारी: नीट (NEET) जैसी परीक्षाओं में धांधली करने वालों के खिलाफ
कड़ी सजा का प्रावधान करने वाला कानून इसी सप्ताह लाने की योजना है।
हालांकि, प्रदर्शनकारियों और सीजीपी (CGP) समर्थकों पर दर्ज एफआईआर (FIR) वापस न लिए जाने से आंदोलनकारियों में असंतोष बना हुआ है।
विपक्ष को मिला बड़ा राजनीतिक फायदा-
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा राजनीतिक लाभ कांग्रेस को मिलता दिख रहा है
सहानुभूति और समर्थन: राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने छात्रों पर लाठीचार्ज के बाद दिल्ली में प्रदर्शन किया,
जिससे आंदोलन की मशाल को आगे बढ़ाने में मदद मिली।
क्रेडिट न लेने की रणनीति: कांग्रेस ने आंदोलन का श्रेय खुद लेने के बजाय छात्रों की सराहना की,
जिससे उनकी साख में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
सीजीपी की तर्ज पर अब एक ‘ई-20 जनता पार्टी’ का गठन भी देश के बदलते राजनीतिक परिदृश्य का स्पष्ट संकेत दे रहा है।