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छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विदेशी फंडिंग का खुलासा: ED जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

25 April 2026 Updated: 30 July 2026
KharunTimes

रायपुर: प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हालिया जांच में सामने आया है

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित जिलों में विदेशी फंडिंग को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है।

विदेशों, विशेष रूप से अमेरिका से करोड़ों रुपये इन क्षेत्रों में भेजे गए।

इस मामले ने सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

क्या है पूरा मामला?

ईडी के अनुसार, छत्तीसगढ़ के धमतरी और बस्तर जैसे नक्सल प्रभावित इलाकों में लगभग 6.5 करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग की गई।

शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि यह पैसा एक अमेरिकी एजेंसी के माध्यम से भारत भेजा गया और स्थानीय स्तर पर खर्च किया गया।

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हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन पैसों का उपयोग किन गतिविधियों के लिए किया गया। ईडी इस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है।

ED ने कैसे किया खुलासा?

विदेशी फंडिंग का यह मामला तब सामने आया जब ईडी ने विदेशी डेबिट कार्ड्स के जरिए भारत में हो रही कैश निकासी को लेकर देशभर में सर्च ऑपरेशन चलाया।

18 और 19 अप्रैल को कई राज्यों में छापेमारी

बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक संदिग्ध व्यक्ति गिरफ्तार

विदेशी बैंक कार्ड्स के जरिए बार-बार कैश निकासी का खुलासा

जांच में यह पाया गया कि इन डेबिट कार्ड्स का इस्तेमाल भारत के विभिन्न एटीएम से बड़ी मात्रा में नकदी निकालने के लिए किया जा रहा था।

किस संगठन से जुड़ा है मामला?

ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि यह पूरा मामला ‘द टिमोथी इनिशिएटिव (TTI)’ नामक संगठन से जुड़ा हुआ है।

यह संगठन ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार से संबंधित गतिविधियों में संलग्न बताया जाता है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि:-

यह संगठन एफसीआरए (Foreign Contribution Regulation Act) के तहत पंजीकृत नहीं है

इसके बावजूद विदेशी फंडिंग का उपयोग भारत में किया गया

फंडिंग का तरीका क्या था?

ईडी के प्रेस नोट के अनुसार:- अमेरिका के ट्रूइस्ट बैंक से जुड़े डेबिट कार्ड भारत लाए गए

इन कार्ड्स के जरिए एटीएम से बार-बार कैश निकाला गया

पिछले कुछ वर्षों में लगभग 6.5 करोड़ रुपये की संदिग्ध निकासी

निकाली गई यह नकदी बाद में भारत में संगठन के खर्चों को पूरा करने में इस्तेमाल की गई।

सुरक्षा और कानूनी पहलू

यह मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है:- क्या यह फंडिंग नक्सल गतिविधियों से जुड़ी है?

– क्या विदेशी धन का उपयोग अवैध गतिविधियों में हुआ?

– बिना एफसीआरए पंजीकरण के फंडिंग कैसे संभव हुई?

इन सभी पहलुओं पर ईडी गहराई से जांच कर रही है।

ED का निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विदेशी फंडिंग का यह मामला बेहद संवेदनशील और गंभीर है।

करोड़ों रुपये की इस संदिग्ध लेन-देन ने देश की आंतरिक सुरक्षा और वित्तीय निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पैसे का वास्तविक उपयोग क्या था और इसके पीछे कौन लोग या संगठन सक्रिय हैं।

आने वाले समय में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

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Laxya Sahu
About the author

Laxya Sahu

लक्ष्य साहू मूलतः नया रायपुर के अभनपुर के निवासी हैं। वे खारुन टाइम्स के प्रधान संपादक हैं तथा सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर लेखन करते हैं । उनकी कृति "चार समाज की बात" समकालीन सामाजिक सरोकारों पर आधारित है । छात्र जीवन से ही वे सामाजिक एवं छात्र हित के मुद्दों से जुड़े रहे हैं , इस दौरान उन्होंने अनेक छात्र एवं जनहित संबंधी आंदोलनों को खड़ा कर उनका नेतृत्व किया तथा लगभग आठ वर्षों तक विद्यार्थियों के विकास के उद्देश्य से शैक्षणिक, सामाजिक और नेतृत्व विकास कार्यक्रमों का आयोजन एवं संचालन किया। वर्तमान में वे पत्रकारिता और साहित्य के माध्यम से सामाजिक, राजनीतिक और जनसरोकारों से जुड़े विषयों पर नियमित कार्य कर रहे हैं।

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