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पूर्व गृहमंत्री का अपनी ही सरकार के अफसर पर हमला, जांच के लिए प्रधानमंत्री मोदी को लिखा पत्र

17 February 2026
KharunTimes

पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर ने लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता पर भ्रष्टाचार, नियमों की अनदेखी और अनियमित भुगतान के आरोप लगाते हुए पीएम, सीएम व मंत्री को पत्र लिखकर केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग की।

पदोन्नति प्रक्रिया और लंबित मामलों पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं |

लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता पर गंभीर आरोप-

छत्तीसगढ़ की राजनीति में अपनी बेबाक शैली और साफ छवि के लिए पहचाने जाने वाले पूर्व गृह मंत्री एवं वरिष्ठ आदिवासी नेता ननकीराम कंवर ने लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता विजय कुमार भतपहरी पर गंभीर आरोप लगाते हुए सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और लोक निर्माण मंत्री अरुण साव को पत्र लिखकर केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग की है।

कंवर ने अपने विस्तृत पत्र में आरोप लगाया है कि भतपहरी ने विभाग में विभिन्न पदों पर रहते हुए नियमों की अनदेखी कर अपने चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया, कमीशनखोरी की और बेनामी व रिश्तेदारों के नाम पर अवैध चल-अचल संपत्ति अर्जित की।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो में वर्ष 2011 और 2015 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा भादवि की धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध हुए, लेकिन राजनीतिक पहुंच के कारण इन मामलों में ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी और फाइलें लंबित पड़ी रहीं।

क्या है पत्र में ?

पत्र में राजनांदगांव संभाग के मानपुर–संबलपुर मार्ग निर्माण का मामला भी उठाया गया है, जहां लगभग 6.95 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति के विरुद्ध करीब 10 करोड़ रुपये तक भुगतान किए जाने का आरोप है।

शिकायत के बाद मुख्य तकनीकी परीक्षक (सतर्कता) की जांच में स्वीकृत राशि से करोड़ों अधिक व्यय और रिकॉर्ड संबंधी गंभीर अनियमितताओं की बात सामने आई बताई जाती है।

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इसके बावजूद संबंधित अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है।

इसी तरह बिलासपुर मंडल में निरस्त किए गए एक अनुबंध को पुनर्जीवित कर बिना दंड समयवृद्धि और एस्केलेशन स्वीकृत कर लाखों रुपये का कथित लाभ ठेकेदार को पहुंचाने का आरोप भी लगाया गया है, जिससे शासन को आर्थिक क्षति होने का दावा किया गया है।


केंद्रीय एजेंसी से निष्पक्ष जांच की मांग-

कंवर ने यह भी आरोप लगाया है कि पदोन्नति की प्रक्रिया के दौरान लंबित शिकायतों और गंभीर आरोपों की जानकारी आयोग के समक्ष पूर्ण रूप से नहीं रखी गई, जिससे विभाग के अन्य अभियंताओं में असंतोष और अविश्वास की स्थिति बनी हुई है।

उनका कहना है कि यदि इतने गंभीर प्रकरणों के बावजूद अधिकारी उच्च पदों तक पहुंचते रहे, तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न है।

उन्होंने मांग की है कि संबंधित अधिकारी को पद से हटाकर लंबित प्रकरणों की निष्पक्ष जांच केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए और यदि अनियमितताएं प्रमाणित हों तो शासन को हुए नुकसान की वसूली सुनिश्चित की जाए।

व्यवस्था की विश्वसनीयता का प्रश्न-


यह पूरा मामला केवल एक अधिकारी पर लगे आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था की विश्वसनीयता का प्रश्न है जो विकास कार्यों के माध्यम से सरकार की छवि गढ़ती है। लोक निर्माण विभाग की साख सीधे सड़कों, पुलों और आधारभूत संरचना की गुणवत्ता से जुड़ी होती है।

ऐसे में यदि प्रमुख अभियंता स्तर पर गंभीर आरोप लंबित रहते हैं और कार्रवाई स्पष्ट नहीं होती, तो विपक्ष को सरकार पर निशाना साधने का अवसर मिलता है और आम जनता के मन में भी संदेह पनपता है।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन इन आरोपों को राजनीतिक विवाद मानकर टालता है या फिर पारदर्शी और समयबद्ध जांच के जरिए सच्चाई सामने लाता है।

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Laxya Sahu
About the author

Laxya Sahu

लक्ष्य साहू मूलतः नया रायपुर के अभनपुर के निवासी हैं। वे खारुन टाइम्स के प्रधान संपादक हैं तथा सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर लेखन करते हैं । उनकी कृति "चार समाज की बात" समकालीन सामाजिक सरोकारों पर आधारित है । छात्र जीवन से ही वे सामाजिक एवं छात्र हित के मुद्दों से जुड़े रहे हैं , इस दौरान उन्होंने अनेक छात्र एवं जनहित संबंधी आंदोलनों को खड़ा कर उनका नेतृत्व किया तथा लगभग आठ वर्षों तक विद्यार्थियों के विकास के उद्देश्य से शैक्षणिक, सामाजिक और नेतृत्व विकास कार्यक्रमों का आयोजन एवं संचालन किया। वर्तमान में वे पत्रकारिता और साहित्य के माध्यम से सामाजिक, राजनीतिक और जनसरोकारों से जुड़े विषयों पर नियमित कार्य कर रहे हैं।

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