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भारत की CPI महंगाई अक्टूबर में 0.25% तक आने का दावा है पर क्या सच में सामान सस्ता हुआ ?

29 October 2026
KharunTimes

CPI यानी Consumer Price Index बताता है कि आम परिवार जो चीजें खरीदता है खाना, तेल, कपड़े, किराया, परिवहन, दवा और शिक्षा उनकी कीमतें पिछले साल की तुलना में कितनी बढ़ी हैं। जब CPI महंगाई 0.25% होती है, तो इसका मतलब है कि इन चीजों की औसत कीमत पिछले साल की तुलना में सिर्फ 0.25% बढ़ी है।

सरकारी बैकग्राउंडर के अनुसार भारत की खुदरा महंगाई (CPI) अक्टूबर में लगभग 0.25% तक आ गई, जो ऐतिहासिक निम्न स्तर है। इस गिरावट का मुख्य कारण खाद्य कीमतों में सुधार बताया गया है।

लेकिन आम परिवार के लिए असली सवाल यही है: क्या बाजार में दूध, दाल, सब्जी, किराया, स्कूल फीस और इलाज सच में सस्ता हुआ है? आंकड़ा और बाजार का अनुभव अक्सर अलग दिखते हैं।

अगर अक्टूबर में भारत की खुदरा महंगाई वाकई 0.25% पर आती है, तो यह औपचारिक रिकॉर्ड में असाधारण रूप से कम स्तर होगा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि दूध, दाल, सब्जी, किराया, स्कूल फीस या इलाज सब एक साथ सस्ते हो गए हैं CPI एक व्यापक औसत है, जिसमें कई चीजों की कीमतों का मिश्रित असर दिखता है।

आंकड़ा क्या कह रहा है?

सितंबर 2026 में देश की CPI आधारित खुदरा महंगाई 5.54% थी, जो अगस्त के 4.83% से बढ़ी थी। खाद्य महंगाई भी 5.97% से उछलकर 7.74% हो गई थी, यानी सितंबर तक रसोई का बोझ बढ़ रहा था, न कि घट रहा था।

ग्रामीण इलाकों में खाद्य महंगाई 8.06% और शहरी क्षेत्रों में 7.18% रही। इसका मतलब है कि भोजन पर निर्भर परिवारों खासकर गांवों में को महंगाई का दबाव ज्यादा महसूस हुआ।

रसोई का दर्द

सितंबर में प्याज की महंगाई 108.09% रही, जबकि अदरक 62.85% और लहसुन 54.62% महंगा हुआ। नींबू भी 36.41% महंगा हुआ था।

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ये आंकड़े बताते हैं कि “महंगाई कम हुई” की बड़ी तस्वीर के भीतर कुछ रोजमर्रा की चीजें अभी भी तेजी से महंगी हो सकती हैं। CPI में एक चीज की गिरावट दूसरी चीज की तेज वृद्धि को आंशिक रूप से ढक सकती है।

0.25% का असली मतलब

मान लीजिए किसी परिवार का महीने का खर्च ₹40,000 है। 0.25% महंगाई का अर्थ है कि उसी खर्च का बोझ सालाना आधार पर लगभग ₹100 बढ़ा है यह औसत है, हर खर्च की कहानी नहीं।

  • अगर सब्जी या तेल सस्ता हुआ, तो राशन बिल घट सकता है।
  • लेकिन किराया, डॉक्टर की फीस, दवा, स्कूल फीस और परिवहन अलग दर से बढ़ सकते हैं।
  • सितंबर में परिवहन महंगाई 5.01%, शिक्षा सेवाओं की 3.94% और कपड़ा-जूते की 3.93% थी यानी गैर-खाद्य खर्च भी बढ़ रहे थे।

इसलिए 0.25% वाला आंकड़ा राहत देने वाला जरूर है, पर यह “सब कुछ सस्ता हो गया” का सबूत नहीं है।

GST कटौती का असर

GST दरों में कटौती से कुछ वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें घट सकती हैं, और उसका असर CPI में दिख सकता है। लेकिन यह प्रभाव एक बार का हो सकता है जैसे ही तुलना का आधार बदल जाए, उसका महंगाई दर पर दिखने वाला असर कम हो जाएगा।

जोखिम यह भी है कि वैश्विक कच्चे तेल और शिपिंग लागत में तेजी घरेलू कीमतों में पहुंच सकती है। सितंबर में ही महंगाई में तेजी का एक कारण खाद्य कीमतों के साथ वैश्विक ईंधन महंगाई का आंशिक असर बताया गया था।

कोर महंगाई क्यों मायने रखती है?

खाना और ईंधन की कीमतें मौसम, आपूर्ति और वैश्विक कीमतों से तेजी से बदलती हैं। इसलिए अर्थशास्त्री अक्सर “कोर महंगाई” देखते हैं, जिसमें खाद्य और ईंधन को छोड़ दिया जाता है।

सितंबर में कोर महंगाई 4.33% हो गई थी, जो अगस्त के 4.16% से ऊपर थी। इसका मतलब है कि खाने के अलावा की चीजों सेवाएं, परिवहन, घरेलू सामान और अन्य खर्च में भी दबाव बन रहा था।

अक्टूबर का आंकड़ा अभी अंतिम नहीं

अक्टूबर 2026 का आधिकारिक CPI आंकड़ा 12 नवंबर 2026 को जारी होना है। तब तक 0.25% वाली बात को अनुमान या बैकग्राउंडर स्तर की जानकारी मानना उचित रहेगा, अंतिम आंकड़ा नहीं।

आम परिवार के लिए सही सवाल यह है: क्या राशन की थैली हल्की हुई, किराया रुका, दवा सस्ती हुई और स्कूल का खर्च नियंत्रित रहा? अगर इनमें से कई जवाब ‘नहीं’ हैं, तो 0.25% का आंकड़ा जेब के अनुभव को पूरी तरह बदल नहीं पाएगा।

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Laxya Sahu
About the author

Laxya Sahu

लक्ष्य साहू मूलतः नया रायपुर के अभनपुर के निवासी हैं। वे खारुन टाइम्स के प्रधान संपादक हैं तथा सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर लेखन करते हैं । उनकी कृति "चार समाज की बात" समकालीन सामाजिक सरोकारों पर आधारित है । छात्र जीवन से ही वे सामाजिक एवं छात्र हित के मुद्दों से जुड़े रहे हैं , इस दौरान उन्होंने अनेक छात्र एवं जनहित संबंधी आंदोलनों को खड़ा कर उनका नेतृत्व किया तथा लगभग आठ वर्षों तक विद्यार्थियों के विकास के उद्देश्य से शैक्षणिक, सामाजिक और नेतृत्व विकास कार्यक्रमों का आयोजन एवं संचालन किया। वर्तमान में वे पत्रकारिता और साहित्य के माध्यम से सामाजिक, राजनीतिक और जनसरोकारों से जुड़े विषयों पर नियमित कार्य कर रहे हैं।

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