रायपुर: नेताओं और जनप्रतिनिधियों को दी जा रही सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद सुरक्षा घेरा कम करने की तैयारी की जा रही है।
प्रदेश में वीआईपी सुरक्षा पर हर साल करीब 150 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इस व्यवस्था में लगे पुलिसकर्मियों और वाहनों की तैनाती को लेकर अब सरकार स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
गृह मंत्री विजय शर्मा ने सुरक्षा में कटौती से संबंधित आदेश जल्द जारी होने की बात कही है। वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार से सुरक्षा घटाने के मामले में जल्दबाजी नहीं करने की अपील की है।
इस मुद्दे पर मुख्य सवाल यह है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा की मौजूदा जरूरतों का आकलन कैसे किया जाएगा और सुरक्षा में तैनात पुलिस बल का बेहतर इस्तेमाल किस तरह सुनिश्चित किया जाएगा।
नेताओं की सुरक्षा पर हर साल 150 करोड़ रुपए खर्च
उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में करीब 400 नेताओं और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा में 1,550 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं।
इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था के लिए 500 से ज्यादा वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस पूरे इंतजाम पर सालाना करीब 150 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।
बस्तर संभाग में लंबे समय से नक्सली हिंसा और जनप्रतिनिधियों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं के कारण कई नेताओं को सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी।
अब सुरक्षा के मौजूदा स्तर की समीक्षा करने और जरूरत के मुताबिक पुलिस बल की तैनाती में बदलाव करने की बात सामने आई है।
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हालांकि, सुरक्षा में कटौती का अंतिम दायरा, किन नेताओं की सुरक्षा बदली जाएगी और किस श्रेणी में कितनी कटौती होगी, इसकी पूरी आधिकारिक सूची सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
सुरक्षा में तैनात जवानों को दूसरी जिम्मेदारी देने पर जोर
नेताओं की सुरक्षा में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती के बीच प्रदेश में पुलिस बल की उपलब्धता भी चर्चा का विषय है।
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य पुलिस में 20 हजार से अधिक पद खाली बताए गए हैं। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के जरिए पुलिसकर्मियों का जरूरत के मुताबिक पुनर्विनियोजन करने पर जोर दिया जा रहा है।
यदि किसी जनप्रतिनिधि को पहले के मुकाबले कम सुरक्षा की जरूरत पाई जाती है, तो संबंधित पुलिसकर्मियों को कानून-व्यवस्था, थानों और मैदानी ड्यूटी में लगाया जा सकता है।
इससे पुलिस बल की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार समीक्षा के बाद किस तरह का निर्णय लेती है।
गृह मंत्री विजय शर्मा ने क्या कहा?
गृह मंत्री विजय शर्मा के मुताबिक, नेताओं की सुरक्षा में बदलाव को लेकर आदेश जल्द जारी किया जाएगा। इस बयान के बाद सुरक्षा व्यवस्था में संभावित कटौती को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
सुरक्षा की समीक्षा का आधार संबंधित व्यक्ति को मिलने वाली धमकियों, मौजूदा परिस्थितियों और सुरक्षा एजेंसियों के आकलन को माना जा रहा है।
ऐसे में सभी नेताओं की सुरक्षा एक समान तरीके से घटाने के बजाय व्यक्तिगत खतरे के आकलन के आधार पर निर्णय लेना महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल, अंतिम आदेश और उसमें शामिल विस्तृत प्रावधानों की पुष्टि होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सुरक्षा व्यवस्था में वास्तव में कितने स्तर तक बदलाव किया जाएगा।