रावाभाटा से ग्राउंड रिपोर्ट
रायपुर : रावाभाटा के सरकारी हाई स्कूल में नए शैक्षणिक सत्र की कक्षाएं शुरू हो चुकी हैं, लेकिन स्कूल तक पहुंचने का रास्ता और
यहां उपलब्ध बुनियादी सुविधाएं आज भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं।
करीब तीन महीने पहले स्कूल को रावाभाटा बस्ती से वर्तमान भवन में स्थानांतरित किया गया था।
स्थानांतरण से पहले ही स्थानीय लोगों और स्कूल प्रबंधन ने सड़क सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं की मांग प्रशासन से की थी,
लेकिन अब तक कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है।
बारिश में स्कूल पहुंचना चुनौती
बरसात के दिनों में स्कूल तक जाने वाला कच्चा और कीचड़युक्त रास्ता बेहद खतरनाक हो जाता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार बड़े वाहन भी इस मार्ग से मुश्किल से गुजर पाते हैं।
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ऐसे में रोजाना सैकड़ों विद्यार्थियों को इसी रास्ते से स्कूल पहुंचना पड़ता है, जिससे उनकी सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
भवन निजी संस्था ने बनाया, सड़क अब भी नहीं
वर्तमान स्कूल भवन राउंड टेबल फाउंडेशन द्वारा कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत बनवाया गया है।
भवन की देखरेख भी समिति द्वारा की जाती है।
हालांकि स्कूल सरकारी है, लेकिन भवन तक पहुंचने के लिए सड़क और
अन्य बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था अब तक सरकार द्वारा नहीं की गई है।
230 से अधिक छात्र, शिक्षकों और स्टाफ की भी कमी
विद्यालय में 230 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
यहां केवल 4 सरकारी शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि 3 शिक्षकों की व्यवस्था समिति द्वारा की गई है।
इसके अलावा विद्यालय में प्यून, चपरासी सहित लगभग 12 अन्य स्टाफ पदों की आवश्यकता बताई जा रही है।
स्कूल प्रबंधन के अनुसार इन सभी समस्याओं की जानकारी पहले ही स्थानीय विधायक और जिला शिक्षा अधिकारी को दी जा चुकी है।
स्कूल के उद्घाटन कार्यक्रम में स्वयं विधायक भी मौजूद थे, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
लंबे समय से सुधार की मांग
विद्यालय के शिक्षकों और स्टाफ का कहना है कि सड़क, स्टाफ और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर लंबे समय से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की जा रही है।
इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी हाई स्कूल होने के बावजूद यहां छात्रों को पर्याप्त सरकारी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
वर्तमान में पक्का भवन और सीमित संख्या में शिक्षक ही उपलब्ध हैं,
जबकि सुरक्षित सड़क, पर्याप्त स्टाफ और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का अभाव बना हुआ है।