📍 Raipur, Chhattisgarh 🗓 16 Aug 2026 🕒 05:47 PM
Home » पुरखौती » तिहार परब » सावन 2026 शुरू: क्यों भगवान शिव को समर्पित है यह पावन महीना? जानिए व्रत, पूजा, इतिहास और पौराणिक कथा

सावन 2026 शुरू: क्यों भगवान शिव को समर्पित है यह पावन महीना? जानिए व्रत, पूजा, इतिहास और पौराणिक कथा

30 July 2026
KharunTimes

सावन 2026 : भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र महीना सावन (श्रावण मास) आज से शुरू हो गया है।

इस पूरे महीने देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।

सावन के सोमवार (सावन सोमवारी) का विशेष महत्व माना जाता है।

क्यों खास है सावन महीना?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है।

इस दौरान की गई पूजा, जप, तप और दान का विशेष फल प्राप्त होता है।

श्रद्धालु मानते हैं कि सच्चे मन से शिव की आराधना करने पर जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें

छत्तीसगढ़ की ब्रेकिंग न्यूज़, ग्राउंड रिपोर्ट और महत्वपूर्ण अपडेट सबसे पहले सीधे अपने WhatsApp पर प्राप्त करें।

अभी जुड़ें

इतिहास और पौराणिक कथा:

पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकले विष हलाहल से पूरी सृष्टि संकट में पड़ गई थी।

तब भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए उस विष का पान किया।

विष के प्रभाव को कम करने के लिए देवताओं ने शिवजी पर लगातार जल अर्पित किया, जिससे उनका कंठ नीला हो गया और वे नीलकंठ कहलाए।

इसी कारण सावन में जलाभिषेक की परंपरा विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

एक अन्य मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी।

उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया।

इसलिए अविवाहित युवतियां भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से सावन सोमवार का व्रत रखती हैं।

सावन सोमवार व्रत का महत्व:

सावन के प्रत्येक सोमवार को व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा की जाती है।

मान्यता है कि इससे मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

पूजा विधि:

  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध और बेलपत्र अर्पित करें।
  • धतूरा, भांग, सफेद पुष्प और फल अर्पित करें।
  • “ॐ नमः शिवाय” तथा महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।

ॐ त्र्यंबकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

अर्थ: हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की उपासना करते हैं, जो सुगंध की तरह सर्वत्र व्याप्त हैं और सभी प्राणियों का पालन-पोषण करते हैं।

जैसे पका हुआ फल (खीरा या ककड़ी) अपनी बेल से सहज ही अलग हो जाता है,

वैसे ही हे भगवान! हमें मृत्यु, भय और सभी बंधनों से मुक्त करें तथा अमृतस्वरूप मोक्ष और कल्याण प्रदान करें।

  • भगवान शिव की आरती कर प्रसाद वितरित करें।

सावन में क्या करें?

  • भगवान शिव का नियमित पूजन करें।
  • जरूरतमंद लोगों की सहायता और दान करें।
  • सात्विक भोजन ग्रहण करें।
    क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।

हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें

छत्तीसगढ़ की ब्रेकिंग न्यूज़, ग्राउंड रिपोर्ट और महत्वपूर्ण अपडेट सबसे पहले सीधे अपने WhatsApp पर प्राप्त करें।

अभी जुड़ें
Laxya Sahu
About the author

Laxya Sahu

लक्ष्य साहू मूलतः नया रायपुर के अभनपुर के निवासी हैं। वे खारुन टाइम्स के प्रधान संपादक हैं तथा सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर लेखन करते हैं । उनकी कृति "चार समाज की बात" समकालीन सामाजिक सरोकारों पर आधारित है । छात्र जीवन से ही वे सामाजिक एवं छात्र हित के मुद्दों से जुड़े रहे हैं , इस दौरान उन्होंने अनेक छात्र एवं जनहित संबंधी आंदोलनों को खड़ा कर उनका नेतृत्व किया तथा लगभग आठ वर्षों तक विद्यार्थियों के विकास के उद्देश्य से शैक्षणिक, सामाजिक और नेतृत्व विकास कार्यक्रमों का आयोजन एवं संचालन किया। वर्तमान में वे पत्रकारिता और साहित्य के माध्यम से सामाजिक, राजनीतिक और जनसरोकारों से जुड़े विषयों पर नियमित कार्य कर रहे हैं।

Previous पीएम किसान सम्मान निधि योजना 2026: किसानों को हर साल ₹6,000 की आर्थिक सहायता, जानें पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और किस्त की पूरी जानकारी: Next नक्सल-मुक्त भारत: सुरक्षा, विकास और सुशासन की नई दिशा

Leave a Comment