रायपुर | त्योहारों के मौसम में मिठाई, खोया और पनीर की मांग बढ़ जाती है। इसी के साथ मिलावट को लेकर भी लोगों की चिंता बढ़ती है। FSSAI के अनुसार, दूध और दूध से बने उत्पादों में स्टार्च जैसी मिलावट की पहचान के लिए कुछ आसान घरेलू क्विक टेस्ट किए जा सकते हैं।
FSSAI की 2026 की वेबसाइट पर भी घर पर मिलावट की जांच से जुड़े DART टेस्ट उपलब्ध हैं।
खोया-पनीर में स्टार्च की ऐसे करें जांच:
FSSAI के DART टेस्ट के मुताबिक खोया, छेना और पनीर में स्टार्च की मौजूदगी जांचने के लिए सैंपल को थोड़े पानी के साथ उबालकर ठंडा किया जाता है। इसके बाद आयोडीन टिंक्चर की 2-3 बूंदें डाली जाती हैं।
अगर नमूने का रंग नीला या नीला-काला होने लगे तो यह स्टार्च की मौजूदगी का संकेत है।
टेस्ट का तरीका:
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें
छत्तीसगढ़ की ब्रेकिंग न्यूज़, ग्राउंड रिपोर्ट और महत्वपूर्ण अपडेट सबसे पहले सीधे अपने WhatsApp पर प्राप्त करें।
- करीब 2-3 ml खोया/पनीर का सैंपल लें।
- इसमें लगभग 5 ml पानी डालकर उबालें।
- मिश्रण को ठंडा होने दें।
- इसमें 2-3 बूंद आयोडीन टिंक्चर डालें।
- रंग में बदलाव को देखें।
नीला रंग आने पर स्टार्च की मौजूदगी का संकेत माना जाता है।
हालांकि घरेलू टेस्ट केवल शुरुआती संकेत देता है; किसी खाद्य पदार्थ को अंतिम रूप से मिलावटी घोषित करने के लिए प्रयोगशाला जांच जरूरी हो सकती है।
मिठाई में मिलावट से क्या खतरा ?
मिलावटी खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले पदार्थ स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। इसलिए त्योहारों के दौरान मिठाई, खोया और पनीर खरीदते समय साफ-सफाई, पैकेजिंग, लेबल और भरोसेमंद विक्रेता पर ध्यान देना जरूरी है।
FSSAI ने दूध और दूध से बने उत्पादों में मिलावट की पहचान के लिए कई क्विक टेस्ट बताए हैं। इनमें खोया, छेना, पनीर और घी में स्टार्च की जांच भी शामिल है।
LIVE TEST में क्या समझाया गया?
मिलावट की जांच के इस तरीके में आयोडीन के साथ होने वाले रंग परिवर्तन को देखकर स्टार्च की मौजूदगी का संकेत समझा जा सकता है।
इसी तरह FSSAI का DART बुकलेट घर पर खाद्य पदार्थों में सामान्य मिलावट की पहचान के लिए 50 से ज्यादा टेस्ट उपलब्ध कराता है।
ध्यान रखें:
आयोडीन से जांच करते समय इसे आंखों, त्वचा और कपड़ों से दूर रखें। FSSAI के तकनीकी मैनुअल में भी आयोडीन के इस्तेमाल के दौरान सावधानी बरतने की बात कही गई है।
नोट: घरेलू जांच किसी खाद्य पदार्थ की प्रयोगशाला-स्तरीय पुष्टि का विकल्प नहीं है। संदिग्ध खाद्य पदार्थ मिलने पर उसका सेवन न करें और संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत करें।i