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78 वर्ष की आयु में 54 बार जेल: दादा ठाकुर से खास बातचीत

27 February 2026 Updated: 6 March 2026 1 min read

रायपुर – ठाकुर रामगुलाम सिंह, जिन्हें प्रदेश में दादा ठाकुर के नाम से जाना जाता है,

आज भी संघर्ष की ऐसी मिसाल हैं जो युवाओं को ऊर्जा देती है।

78 वर्ष की आयु में भी उनका तेवर और जनसरोकारों के प्रति समर्पण कम नहीं हुआ है।

वे उन नेताओं में रहे हैं जिन्होंने अलग छत्तीसगढ़ राज्य की मांग को बुलंद आवाज़ दी।

किसान हित, क्षेत्रीय अस्मिता और स्थानीय अधिकारों की लड़ाई को उन्होंने अपने जीवन का उद्देश्य बनाया।

54 बार कारावास: आंदोलन की कीमत

दादा ठाकुर आपातकाल के दौरान जेल जा चुके हैं और अपने जीवन में कुल 54 बार कारावास का सामना कर चुके हैं।

उनका कहना है कि “संघर्ष की राह आसान नहीं होती, लेकिन जनहित के लिए आवाज़ उठाना ही असली राजनीति है।”

प्रदेश में किसान आंदोलनों से लेकर स्थानीय मुद्दों तक, उन्होंने कई बार प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला।

यही कारण है कि वे छत्तीसगढ़ के प्रख्यात किसान नेता के रूप में पहचाने जाते हैं।

वर्तमान मुद्दों पर बेबाक राय

हाल ही में छत्तीसगढ़ी क्रांति सेना के बैनर तले नगर निगम घेराव के ऐलान को लेकर खारून टाइम्स की टीम ने उनसे विशेष बातचीत की।

इस दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सहित प्रदेश और देश की राजनीति पर खुलकर अपनी बात रखी।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनकी लड़ाई किसी दल विशेष से नहीं,

बल्कि छत्तीसगढ़ और उसके मेहनतकश वर्ग के अधिकारों के लिए है।

गैर-राजनीतिक संगठन, लेकिन मुखर आवाज़

छत्तीसगढ़ी क्रांति सेना स्वयं को गैर-राजनीतिक संगठन बताती है।

उल्लेखनीय है कि इसी संगठन से अलग होकर “जोहार पार्टी” का गठन हुआ था।

इसके बावजूद दादा ठाकुर का दावा है कि उनका मूल उद्देश्य केवल छत्तीसगढ़ की अस्मिता और किसानों के अधिकारों की रक्षा है।

पूरा इंटरव्यू देखें

78 वर्ष की उम्र में 54 बार जेल जाने वाले इस जुझारू किसान नेता की बेबाक राय और पूरे संघर्ष को जानने के लिए YouTube पर पूरा वीडियो अवश्य देखें।


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Laxya Sahu
About the author

Laxya Sahu

मूलतः नये रायपुर के उपनगर अभनपुर से आने वाले लक्ष्मीकांत साहू जिन्हें लक्ष्य साहू के नाम से भी जाना जाता है, खारुन टाइम्स के संपादक के रूप में पदस्थ हैं । उनकी शिक्षा रसायन शास्त्र में स्नातकोत्तर एवं कंप्यूटर एप्लीकेशन में हुई है । वे हिंदी साहित्य के व्यंग विधा में सामाजिक राजनीतिक व्यंगकार है, “चार समाज की बात” उनकी कृतियों में से एक है । छात्र जीवन से ही समाजहित और छात्रहित में अनेक आंदोलनों का सफल नेतृत्व करते हुए विद्यार्थियों के विकास हेतु अनेक कार्यक्रमों के आयोजक रहे ।

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