धमतरी के टिकरापारा में 28 सितंबर को एक निजी घर में चल रही प्रार्थना सभा को लेकर उपजा विवाद छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण की गहराई को फिर से उजागर करता है।
हिंदू संगठनों के 5-7 घंटे तक चले भारी विरोध प्रदर्शन के बाद मौके पर पुलिस बल तैनात करना पड़ा और ज्ञापन देकर राज्य के धर्म स्वातंत्र्य कानून को सख्ती से लागू करने की मांग की गई।
धमतरी में स्थिति कितनी संवेदनशील है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि क्षेत्र के लगभग 40 चर्चों (जिनमें 117 वर्ष पुराना मेनोनाइट चर्च भी शामिल है) के बाहर “केवल ईसाई प्रवेश कर सकते हैं” के प्रतिबंधात्मक बोर्ड लगाए गए हैं, जबकि 1,500 से अधिक आवेदन प्रार्थना सभाओं में शामिल होने के लिए लंबित हैं।

धमतरी की यह ताजा घटना कोई छिटपुट या पृथक मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे छत्तीसगढ़ में तेजी से पैर पसार रहे एक सुनियोजित धर्मांतरण नेटवर्क का प्रत्यक्ष संकेत है।
23 साल बनाम 2 साल:
आंकड़ों में छिपा विस्फोटक सचराज्य के गृह विभाग और अदालती रिकॉर्ड के आंकड़े दर्शाते हैं कि धर्मांतरण की घटनाएं किस रफ्तार से बढ़ी हैं:
2000 से 2023 (23 वर्ष): राज्य गठन के बाद शुरुआती 23 वर्षों में धर्मांतरण से जुड़ी कुल 38 FIR दर्ज की गई थीं (औसतन 1.65 मामले प्रति वर्ष)।
2024 से 2025 (2 वर्ष): मात्र दो वर्षों की अवधि में 67 FIR दर्ज हो चुकी हैं (औसतन 33.5 मामले प्रति वर्ष)।
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यह तुलनात्मक अंतर 176% की भीषण वृद्धि (1.76 गुना) को दर्शाता है।
केवल 2024-25 के दौरान राज्य के विभिन्न जिलों से धर्मांतरण से संबंधित 45 गंभीर शिकायतें सामने आईं, जिनमें से 23 मामलों में तत्काल आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए।
विशेषकर आदिवासी बहुल बस्तर संभाग में अकेले 2024 के दौरान 23 शिकायतें दर्ज हुईं। बिलासपुर, कोरबा, बलरामपुर, जांजगीर-चांपा, रायपुर, बालोद, दुर्ग और दंतेवाड़ा जैसे जिले भी इस संगठित नेटवर्क के मुख्य केंद्र बनकर उभरे हैं।
छत्तीसगढ़ के प्रमुख चर्चित मामले:
राज्य में चल रही धर्मांतरण की गतिविधियों के तरीकों और उनके कानूनी-सामाजिक असर को समझने के लिए पिछले तीन वर्षों के प्रमुख मामलों का विश्लेषण आवश्यक है:
1. गरियाबंद (राजिम) ‘चमत्कारी इलाज’ हत्याकांड (मई 2026)
आजीवन कारावास – गरियाबंद जिले के राजिम क्षेत्र में पास्टर ईश्वरी साहू ने ‘चमत्कारी इलाज’ (Miracle Healing) का झांसा देकर 18 वर्षीय योगिता सोनवानी का आधुनिक डॉक्टरी इलाज रुकवा दिया, जिससे युवती की मृत्यु हो गई।
मामले में FIR नं. 157/2025 पर सुनवाई करते हुए 1 मई 2026 को स्पेशल जज पंकज कुमार सिन्हा ने पास्टर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
पास्टर पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या), छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम की धारा 4, टोंही प्रताड़ना निवारण अधिनियम की धारा 6-7 और SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत अपराध सिद्ध हुआ।
2. दुर्ग नन गिरफ्तारी व मानव तस्करी मामला (जुलाई 2025) —
NIA कोर्ट में मामला – 25 जुलाई 2025 को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर केरल की दो कैथोलिक ननों (वंदना फ्रांसिस और प्रीति मैरी) को नारायणपुर की 3 बिना पहचान पत्र वाली आदिवासी महिलाओं के साथ गिरफ्तार किया गया।
छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम की धारा 4 और IPC धारा 143 (मानव तस्करी) के तहत मामला दर्ज हुआ।
एनआईए (NIA) कोर्ट ने आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। यह मामला संसद में भी जोर-शोर से उठा था।
3. बिलासपुर केवट पारा मामला (जुलाई 2025) —
पास्टर समेत 7 पर कार्रवाई – बिलासपुर के तोरवा थाना क्षेत्र के केवट पारा में पास्टर विनय सिंह समेत 7 लोगों पर आर्थिक प्रलोभन देकर प्रार्थना सभा के जरिए सामूहिक धर्मांतरण कराने का आरोप लगा।
स्थानीय नागरिक अशोक सिंह की शिकायत पर केस दर्ज हुआ। पुलिस कार्रवाई की मांग को लेकर हिंदू संगठनों ने 7 घंटे तक थाने का घेराव किया था।
4. बिलासपुर पास्टर संजीव सूर्यवंशी मामला (अगस्त 2025) —
साहित्य व डायरियां जब्त – बिलासपुर में प्रार्थना सभा की आड़ में धर्मांतरण कराने की सूचना पर पुलिस ने दबिश दी, जहां 15-20 लोग मौके पर मिले।
पुलिस ने मौके से आपत्तिजनक धार्मिक साहित्य, प्रचार सामग्री और वित्तीय लेन-देन से जुड़ी डायरियां जब्त कीं तथा पास्टर संजीव सूर्यवंशी सहित 8 लोगों पर मामला दर्ज किया।
5. कोरबा कटघोरा मामला (दिसंबर 2025) —
ग्रामीण क्षेत्र में धर्मांतरण का प्रयास – कोरबा जिले के कटघोरा थाना क्षेत्र के एक गांव में प्रार्थना सभा आयोजित कर ग्रामीणों को आकर्षित करने और धर्मांतरण का प्रयास करने का मामला सामने आया।
स्थानीय विरोध के बाद पुलिस ने नामजद पास्टर के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
6. जशपुर होली क्रॉस नर्सिंग कॉलेज मामला (2024-25) —
शिक्षण संस्थान में दबाव – जशपुर के प्रसिद्ध होली क्रॉस नर्सिंग कॉलेज की अंतिम वर्ष की एक हिंदू छात्रा ने कॉलेज की प्रिंसिपल (नन) पर ईसाई धर्म अपनाने के लिए अनुचित मानसिक दबाव बनाने का आरोप लगाया।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गैर-जमानती धाराओं के तहत FIR दर्ज की, जो वर्तमान में न्यायिक जांच के अधीन है।
7. नारायणपुर चर्च विवाद व जनाक्रोश (जनवरी 2023) —
बस्तर में सामाजिक तनाव- बस्तर क्षेत्र में लंबे समय से जारी धर्मांतरण के दबाव के विरोध में जनवरी 2023 में नारायणपुर में आदिवासियों का जनाक्रोश फूट पड़ा।
50 से अधिक लोगों की भीड़ का चर्च परिसर में विवाद हुआ और बीच-बचाव करने पहुंचे पुलिस अधिकारियों पर हमला हुआ।
यह घटना दर्शाती है कि धर्मांतरण किस तरह आदिवासी क्षेत्रों में शांति व्यवस्था को छिन्न-भिन्न कर रहा है।
8. धमतरी टिकरापारा व चर्च बोर्ड विवाद (सितंबर 2026) —
निजी घरों में सभाएं – धमतरी के टिकरापारा में निजी निवास स्थान को बिना अनुमति प्रार्थना केंद्र बनाकर गतिविधियां चलाने का विरोध हुआ।
धमतरी में 40 से अधिक चर्चों के बाहर बाहरी लोगों के प्रवेश पर पाबंदी के बोर्ड लगाना और 1,500 से अधिक लोगों के प्रार्थना सभाओं के आवेदनों का सामने आना, सुनियोजित जनांकिकी परिवर्तन की ओर इशारा करता है।
सामाजिक, सांस्कृतिक व कानूनी दुष्परिणाम
इन मामलों से स्पष्ट है कि धर्मांतरण का मुद्दा केवल व्यक्तिगत आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके व्यापक दुष्प्रभाव सामने आ रहे हैं:
जीवन व स्वास्थ्य पर खतरा:
गरियाबंद (राजिम) का मामला साबित करता है कि अंधविश्वास और ‘चंगाई सभाओं’ के नाम पर आधुनिक चिकित्सा का बहिष्कार कराना जानलेवा साबित हो रहा है।
संगठित मानव तस्करी:
दुर्ग में ननों की गिरफ्तारी से उजागर हुआ कि बिना पहचान पत्र के असहाय आदिवासी महिलाओं को दूसरे राज्यों में भेजने का एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह सक्रिय है।
आदिवासी पहचान व संस्कृति पर प्रहार:
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अपने महत्वपूर्ण प्रेक्षण में स्पष्ट किया है कि प्रलोभन द्वारा कराया जाने वाला धर्मांतरण एक “सामाजिक नासूर” (Social Menace) है, जो आदिवासियों की सदियों पुरानी रूढ़िजन्य परंपराओं, देव-स्थलों, पर्व-त्योहारों और सांस्कृतिक पहचान को नष्ट करता है।
संवैधानिक ढांचा और पेसा (PESA) अधिनियम:
बस्तर और कांकेर की ग्राम सभाओं द्वारा अपनी पारंपरिक संस्कृति की रक्षा के लिए बाहरी पास्टरों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के फैसलों को सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट दोनों ने संवैधानिक रूप से वैध माना है।
अदालतों ने स्वीकार किया है कि पेसा कानून के तहत ग्राम सभाओं को अपनी स्थानीय संस्कृति और समुदाय की रक्षा करने का पूर्ण अधिकार है।
धमतरी से लेकर बस्तर तक सामने आ रही घटनाएं और 23 साल के 38 मामलों के मुकाबले 2 साल में दर्ज 67 FIR का आंकड़ा यह स्पष्ट करता है कि छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण एक गंभीर सामाजिक व प्रशासनिक चुनौती बन चुका है।
इसके समाधान के लिए अवैध प्रार्थना सभाओं पर रोक, प्रलोभन देने वालों पर कठोर कानूनी कार्रवाई और आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के लिए संवैधानिक प्रावधानों का कड़ाई से पालन अनिवार्य है।