
NEET पेपर लीक: शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा में पारदर्शिता और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है.
संसद के भीतर भी इस मुद्दे पर हंगामा हो चुका है.
इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों के नाम वीडियो संदेश जारी कर भरोसा दिलाया
कि सरकार केवल दोषियों को पकड़ने तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि कानून को और मजबूत बनाएगी.
अब इसी दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में
पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट 2024 (Public Examinations Prevention of Unfair Means Act) को
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और सख्त बनाने वाले संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है.
सरकार अगले सप्ताह इसे संसद में पेश करने की तैयारी कर रही है.
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि देश में पहले से लागू कानून में क्या प्रावधान थे,
2024 में क्यों बनाना पड़ा नया कानून?
हालांकि पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट 2024 संसद से फरवरी 2024 में ही पारित हो गया था,
लेकिन इसकी सबसे ज्यादा चर्चा NEET-UG 2024 पेपर लीक विवाद के बाद हुई.
NEET-UG 2024 परीक्षा के बाद बिहार और झारखंड से पेपर लीक के आरोप सामने आए.
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. इसके कुछ ही दिनों बाद UGC-NET 2024 परीक्षा भी परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठने के कारण रद्द करनी पड़ी.
इन घटनाओं ने पूरे देश में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए.
इसके बाद केंद्र सरकार ने 21 जून 2024 से यह कानून पूरे देश में लागू कर दिया.
इसका उद्देश्य था कि पेपर लीक, संगठित नकल, डिजिटल छेड़छाड़ और परीक्षा माफिया के खिलाफ पहली बार पूरे देश में एक समान और सख्त कानूनी व्यवस्था लागू की जाए.
पेपर लीक विवाद –
देश में पहली बार परीक्षा माफिया पर शिकंजा कसने के लिए 2024 में कानून बनाया गया था,
लेकिन अब छात्रों के आंदोलन, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और लगातार उठ रहे सवालों के बीच मोदी सरकार इस कानून को और सख्त बनाने जा रही है.
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है जिसमें 10 साल तक की जेल, 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना और फास्ट-ट्रैक कोर्ट जैसी बड़ी व्यवस्थाओं का प्रस्ताव है.