रायपुर। एक ऐसा संगठनात्मक सफर, जिसकी शुरुआत 1993 में संघ के प्रचारक जीवन से हुई थी, अब छत्तीसगढ़ पहुंच चुका है।
भाजपा ने कर्मवीर सिंह को छत्तीसगढ़ प्रदेश महामंत्री (संगठन) की जिम्मेदारी दी है और उनका केंद्र रायपुर रहेगा।
24 सितंबर 2026 को जारी नई नियुक्तियों में उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई।
लेकिन कर्मवीर सिंह की कहानी सिर्फ एक नई नियुक्ति की कहानी नहीं है।
इसके पीछे करीब तीन दशक का वह सफर है, जिसमें उत्तर प्रदेश के कस्बों से लेकर बड़े संगठनात्मक क्षेत्रों और फिर झारखंड तक काम करने का अनुभव जुड़ा है।
अब इसी अनुभव का अगला अध्याय छत्तीसगढ़ में शुरू होने जा रहा है।
1993 में शुरू हुआ सफर, कई पड़ाव पार किए
कर्मवीर सिंह का संगठनात्मक जीवन 1993 में संघ के प्रचारक के रूप में शुरू हुआ।
शुरुआती दौर में तहसील और नगर स्तर की जिम्मेदारियों से आगे बढ़ते हुए उन्होंने फतेहपुर सीकरी, अलीगढ़ और मथुरा जैसे क्षेत्रों में काम किया।
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इसके बाद एटा, अलीगढ़ और बरेली विभाग की जिम्मेदारी संभाली।
संगठन के इसी लंबे अनुभव ने उन्हें धीरे-धीरे बड़े दायित्वों तक पहुंचाया।
वर्ष 2015 में वे मेरठ प्रांत के सह प्रांत प्रचारक बने और 2019 में ब्रज प्रांत के सह प्रांत प्रचारक की जिम्मेदारी संभाली।
फिर 2020 में उनका कामकाज सीधे भाजपा संगठन से जुड़ा।
उत्तर प्रदेश भाजपा में प्रदेश सह महामंत्री (संगठन) के तौर पर उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संगठनात्मक काम को संभाला।
2022 में झारखंड, अब छत्तीसगढ़
अगस्त 2022 में कर्मवीर सिंह को झारखंड भाजपा का प्रदेश महामंत्री (संगठन) बनाया गया।
करीब चार साल तक झारखंड में संगठन की जिम्मेदारी संभालने के बाद अब उन्हें छत्तीसगढ़ भेजा गया है।

यानी मथुरा से शुरू हुआ सफर अब रायपुर तक पहुंच गया है।
छत्तीसगढ़ उनके लिए एक अलग तरह का संगठनात्मक क्षेत्र होगा।
यहां मैदानी इलाकों के साथ बस्तर और सरगुजा जैसे विस्तृत आदिवासी क्षेत्र हैं, वहीं रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर जैसे तेजी से बढ़ते शहरी और औद्योगिक क्षेत्र भी हैं।
ऐसे विविध सामाजिक और भौगोलिक क्षेत्रों में संगठन का काम एक समान नहीं होता।
बूथ से लेकर मंडल और जिला स्तर तक संगठनात्मक संवाद इस जिम्मेदारी का अहम हिस्सा रहेगा।
रायपुर से शुरू होगा नया अध्याय

कर्मवीर सिंह के लिए छत्तीसगढ़ सिर्फ नया प्रदेश नहीं, बल्कि उनके तीन दशक लंबे संगठनात्मक अनुभव का नया पड़ाव है।
1993 में शुरू हुई यात्रा ने उन्हें उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से झारखंड तक पहुंचाया और अब वही रास्ता रायपुर आकर ठहरता है।