दुर्ग: छत्तीसगढ़ के दुर्ग में छह साल तीन महीने की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में विशेष पॉक्सो फास्ट ट्रैक अदालत ने उसके 24 वर्षीय चाचा को मृत्युदंड की सजा सुनाई है।
अदालत ने अपराध को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ यानी विरलतम श्रेणी का माना।
बच्ची 6 अप्रैल 2025 को कन्या भोज के लिए घर से निकली थी और बाद में उसका शव घर के पास खड़ी एक कार में मिला था।
करीब 17 महीने चली कानूनी प्रक्रिया के बाद 10 सितंबर 2026 को अदालत ने फैसला सुनाया।
कन्या भोज के लिए निकली थी बच्ची, फिर नहीं लौटी
मामला दुर्ग के मोहन नगर थाना क्षेत्र का है।
पुलिस के मुताबिक, 6 अप्रैल 2025 को छह साल तीन महीने की बच्ची पड़ोस में अपनी दादी के घर आयोजित कन्या भोज में शामिल होने गई थी।
कुछ समय बाद जब वह घर नहीं लौटी तो परिवार ने उसकी तलाश शुरू की।
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बच्ची के नहीं मिलने पर पुलिस को सूचना दी गई और मोहन नगर थाने में अपराध क्रमांक 133/2025 दर्ज किया गया।
तलाश के दौरान बच्ची का शव घर के पास खड़े एक वाहन में मिला।
उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
पोस्टमार्टम और बाद की जांच में बच्ची के साथ यौन अपराध और हत्या की पुष्टि हुई।
पड़ोसी की कार में शव मिलने से जांच की दिशा बदली
घटना के शुरुआती चरण में बच्ची का शव एक पड़ोसी की कार में मिलने से मामला और पेचीदा हो गया था।
पुलिस ने कार से जुड़े लोगों समेत कई संदिग्धों से पूछताछ की।
जांच आगे बढ़ने पर बच्ची के 24 वर्षीय चाचा पर संदेह केंद्रित हुआ।
अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने बच्ची का यौन उत्पीड़न करने के बाद उसकी हत्या की और शव को पड़ोसी की कार में रख दिया।
पुलिस जांच में DNA, फॉरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों समेत कई तरह के प्रमाण जुटाए गए।
इन्हीं साक्ष्यों को बाद में अदालत के सामने पेश किया गया।
अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी माना।
वारदात के बाद शव छिपाने का आरोप
जांच में सामने आया कि आरोपी ने बच्ची को उस समय निशाना बनाया जब वह कन्या भोज के लिए गई थी।
अभियोजन का कहना था कि हत्या के बाद साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से बच्ची के शव को पड़ोसी की कार में रखा गया।
इसी आरोप के तहत आरोपी को साक्ष्य मिटाने से संबंधित प्रावधान के तहत भी दोषी ठहराया गया।
मामले की गंभीरता देखते हुए गठित हुई थी SIT
घटना के बाद दुर्ग में व्यापक आक्रोश देखने को मिला था।
मामले की जांच को तेज करने और सभी महत्वपूर्ण साक्ष्यों को व्यवस्थित तरीके से जुटाने के लिए दुर्ग पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था।
SIT को चार्जशीट और महत्वपूर्ण साक्ष्यों की जांच की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई थी।
घटना के बाद जिला अधिवक्ता संघ ने भी आरोपी का बचाव नहीं करने का निर्णय लिया था।
मामले में जल्द सुनवाई और कठोर सजा की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए थे।
किन धाराओं में हुई सजा?
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, चतुर्थ फास्ट ट्रैक कोर्ट एवं विशेष पॉक्सो न्यायालय, दुर्ग ने आरोपी को पॉक्सो अधिनियम की धारा 6(1) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत मृत्युदंड सुनाया।
इसके अलावा BNS की धारा 238(क) के तहत साक्ष्य गायब करने से संबंधित अपराध के लिए पांच वर्ष के सश्रम कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा भी सुनाई गई।
पॉक्सो और हत्या की दोनों धाराओं में पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
अदालत ने क्यों माना ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’?
अदालत ने अपराध की प्रकृति, पीड़िता की कम उम्र, उसके साथ हुए यौन अपराध और इसके बाद की गई हत्या तथा शव को छिपाने की कोशिश समेत मामले की परिस्थितियों को गंभीर माना।
इन्हीं आधारों पर अपराध को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में रखते हुए मृत्युदंड दिया गया।
मामले में अभियोजन की ओर से पेश किए गए DNA, फॉरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों ने भी दोषसिद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अदालत के फैसले के बाद अब मृत्युदंड की पुष्टि के लिए मामला नियमानुसार छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के समक्ष जाएगा।
दुर्ग में परिवार को 7 लाख रुपये मुआवजा
अदालत ने पीड़ित परिवार को राज्य शासन की आहत प्रतिकर योजना के तहत सात लाख रुपये की सहायता राशि देने का भी निर्देश दिया है ।