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झीरम के सबूत थे तो NIA को क्यों नहीं दिए? CM साय का कांग्रेस पर पलटवार

7 September 2026
KharunTimes

रायपुर। झीरम मामले में NIA कोर्ट के हालिया फैसले के बाद छत्तीसगढ़ की सियासत गरमा गई है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कांग्रेस की ओर से की जा रही बयानबाजी पर पलटवार करते हुए सवाल किया कि

अगर कांग्रेस नेताओं के पास झीरम मामले से जुड़े कोई सबूत या तथ्य थे, तो उन्हें जांच एजेंसी के सामने क्यों नहीं रखा गया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस प्रकरण की जांच NIA को उस समय सौंपी गई थी,

जब केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार थी।

उनके मुताबिक करीब 13 वर्षों तक जांच और न्यायिक प्रक्रिया चली।

इस दौरान 100 से ज्यादा गवाहों की गवाही हुई और तथ्यों एवं साक्ष्यों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने अपना फैसला सुनाया है।

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‘सबूत थे तो NIA को क्यों नहीं सौंपे’

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर निशाना साधते हुए कहा कि

विपक्ष में रहते हुए बघेल अक्सर कहते थे कि उनके पास झीरम मामले के सबूत हैं।

साय ने सवाल किया कि यदि उनके पास वास्तव में कोई प्रमाण या सबूत था, तो उसे NIA को क्यों नहीं सौंपा गया?

मुख्यमंत्री के मुताबिक जांच एजेंसी के सामने तथ्य रखने के लिए पर्याप्त समय था।

उन्होंने कहा कि केवल आरोप लगाने से बात साबित नहीं होती।

न्यायिक प्रक्रिया राजनीतिक बयानों के आधार पर नहीं, बल्कि तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ती है।

‘NIA देश की प्रमुख जांच एजेंसी’

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि NIA किसी राज्य सरकार की जांच एजेंसी नहीं, बल्कि देश की प्रमुख जांच एजेंसियों में से एक है।

उन्होंने कहा कि जब झीरम प्रकरण NIA को सौंपा गया, उस समय केंद्र में कांग्रेस की ही सरकार थी।

साय ने कहा कि मामले की लंबी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब अदालत का फैसला सामने आया है।

उनके अनुसार न्यायालय ने 10 लोगों को दोषी ठहराया है और 16 सितंबर को दोषियों की सजा का निर्धारण किया जाएगा।

कांग्रेस पर लगाया ‘फूट डालो और राज करो’ की राजनीति का आरोप

मुख्यमंत्री साय ने कांग्रेस में प्रदेश प्रभारियों के बदलाव को लेकर भी निशाना साधा।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की राजनीति आज भी अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति पर चल रही है।

साय के मुताबिक कांग्रेस जहां जाती है, वहां गुटबाजी और आपसी खींचतान शुरू हो जाती है।

उन्होंने कहा कि जनता के मुद्दों पर एकजुट होकर काम करने के बजाय कांग्रेस के नेता आपसी राजनीतिक लड़ाई में उलझे रहते हैं।

भूपेश बघेल के प्रभार बदलाव पर CM साय का तंज

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रभार में बदलाव को लेकर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि

जब बघेल को पंजाब का प्रभारी बनाया गया था, तब वहां भी उनके विरोध की बात सामने आई थी।

उन्होंने कहा कि शायद इसी का नतीजा है कि अब उनका प्रभार बदल दिया गया है।

साय ने इसे कांग्रेस का आंतरिक मामला बताते हुए कहा कि

पार्टी के भीतर लगातार सामने आ रहे विरोध और खींचतान से उसकी राजनीतिक कार्यसंस्कृति दिखाई देती है।

‘जनता को बयानबाजी नहीं, तथ्य और प्रमाण चाहिए’

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर न्यायिक फैसलों को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने भीतर झांकना चाहिए।

साय ने कहा कि एक तरफ कांग्रेस के नेता न्यायिक फैसलों पर सवाल उठाते हैं और दूसरी तरफ संगठन के भीतर ही एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोलते हैं।

उन्होंने दावा किया कि छत्तीसगढ़ की जनता आरोप-प्रत्यारोप और भ्रम की राजनीति को समझती है और उसे बयानबाजी नहीं, बल्कि तथ्य और प्रमाण चाहिए।

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