सरगुजा: छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में लगातार बुखार के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग और डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी है।
पहाड़ी कोरवा और पंडो जनजाति के इलाकों में अब तक करीब 72 लोगों में लगातार बुखार की शिकायत सामने आई है।
अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में इन मामलों की जांच और रिसर्च शुरू कर दी गई है।
मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के HOD डॉ. पंकज टेभूलकर के मुताबिक, जिन मरीजों का बुखार कई दिनों तक कम नहीं हो रहा है, उनकी विस्तृत जांच की जा रही है।
इनमें लेप्टोस्पाइरा और स्क्रब टाइफस जैसे संक्रमणों की भी जांच शामिल है।
संक्रमण का वास्तविक कारण सैंपल और विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
क्या है लेप्टोस्पायरोसिस ?
लेप्टोस्पायरोसिस एक बैक्टीरियल बीमारी है, जो Leptospira बैक्टीरिया के कारण होती है।
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यह बैक्टीरिया संक्रमित जानवरों के पेशाब के जरिए पानी, मिट्टी या अन्य सतहों को दूषित कर सकता है।
इंसान दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने, संक्रमित जानवर के शरीर के तरल पदार्थ को छूने अथवा दूषित भोजन-पानी के जरिए संक्रमित हो सकता है।
चूहे समेत कई जानवर इसके संक्रमण के स्रोत हो सकते हैं।
सरगुजा में क्यों बढ़ी चिंता ?
अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के मुताबिक, प्रभावित इलाकों में ऐसे मरीज सामने आए हैं जिनका बुखार कई दिनों के बाद भी कम नहीं हो रहा है।
ऐसे मामलों में सामान्य बुखार के अलावा दूसरे संक्रमणों की भी जांच जरूरी मानी जा रही है।
मेडिसिन, कम्युनिटी मेडिसिन और माइक्रोबायोलॉजी विभाग की टीम मामले की जांच कर रही है।
प्रभावित गांवों में जाकर मरीजों की जांच और आवश्यक सैंपल लेने की भी तैयारी है।
लेप्टोस्पायरोसिस के प्रमुख लक्षण क्या हैं?
लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण कई दूसरी बीमारियों जैसे हो सकते हैं।
इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती।
इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं :-
तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों और शरीर में दर्द, ठंड लगना, मतली या उल्टी दस्त पेट दर्द
कमजोरी और थकान आंखों का लाल होना कुछ मामलों में त्वचा पर दाने
गंभीर स्थिति में आंखों या त्वचा का पीला पड़ना यानी पीलिया
CDC के अनुसार संक्रमण के संपर्क में आने के बाद बीमारी के लक्षण आमतौर पर 5 से 14 दिन में दिखाई दे सकते हैं,
हालांकि यह अवधि 2 से 30 दिन तक हो सकती है।
गंभीर होने पर किडनी और लिवर को हो सकता है नुकसान
लेप्टोस्पायरोसिस का समय पर इलाज न होने पर यह गंभीर रूप ले सकता है।
कुछ मरीजों में किडनी फेलियर, लिवर फेलियर, पीलिया, सांस लेने में परेशानी और मेनिन्जाइटिस जैसी जटिलताएं हो सकती हैं।
गंभीर मामलों में कई अंग प्रभावित होने का खतरा रहता है।
यही वजह है कि लंबे समय से जारी बुखार को नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
जानवरों के पेशाब से बीमारी कैसे फैलती है?
संक्रमित जानवर के पेशाब में मौजूद बैक्टीरिया पानी या मिट्टी में पहुंच सकते हैं।
अगर व्यक्ति इस दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आता है, खासकर शरीर पर कट या घाव होने पर, तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
भारी बारिश, बाढ़ या जलभराव के बाद जोखिम बढ़ सकता है, क्योंकि संक्रमित जानवरों का पेशाब पानी और मिट्टी को दूषित कर सकता है।
लेप्टोस्पायरोसिस से बचने के 7 आसान तरीके
1. संदिग्ध दूषित पानी से बचें:बाढ़ या भारी बारिश के बाद ऐसे पानी में न उतरें जिसके दूषित होने की आशंका हो।
2. घाव को ढककर रखें:कट, खरोंच या खुले घाव पर वाटरप्रूफ पट्टी लगाएं।
3. जूते और दस्ताने पहनें: मिट्टी, गंदे पानी या पशुओं के संपर्क में काम करते समय सुरक्षात्मक जूते और दस्ताने पहनें।
4. हाथ अच्छी तरह धोएं: जानवरों या ऐसी सतहों को छूने के बाद हाथ साबुन से अच्छी तरह साफ करें, जिन पर पशुओं का पेशाब या अन्य शरीर के तरल पदार्थ लगे होने की आशंका हो।
5. पीने का पानी सुरक्षित रखें: संदिग्ध पानी को बिना उपचार के न पिएं। जरूरत पड़ने पर पानी को उबालकर या उचित तरीके से ट्रीट करके ही इस्तेमाल करें।
6. चूहों पर नियंत्रण रखें: घर के आसपास कचरा और खाने-पीने की चीजें खुले में न छोड़ें। चूहे लेप्टोस्पायरोसिस के संक्रमण का महत्वपूर्ण स्रोत हो सकते हैं।
7. लगातार बुखार को नजरअंदाज न करें: खासकर अगर किसी व्यक्ति का दूषित पानी, मिट्टी या जानवरों के संपर्क का इतिहास है, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी दें।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर बुखार लगातार बना हुआ है और उसके साथ तेज सिरदर्द, शरीर में दर्द, उल्टी, पीलिया, आंखों का लाल होना, सांस लेने में परेशानी या पेशाब से जुड़ी समस्या जैसे लक्षण दिखाई दें, तो जल्द चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।
सरगुजा के मौजूदा मामलों में भी डॉक्टरों ने लंबे समय तक बने रहने वाले बुखार को नजरअंदाज न करने की सलाह दी है।