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छत्तीसगढ़ के राज्यपाल पर आपत्तिजनक कमेंट्स: हाईकोर्ट ने कहा- सार्वजनिक रूप से मांगनी होगी माफी, पोस्ट हटाकर दोबारा गलती न करने का वचन

27 August 2026
KharunTimes

बिलासपुर | छत्तीसगढ़ के राज्यपाल से संबंधित आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट और कार्टून साझा करने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है।

कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को राहत देते हुए FIR रद्द कर दी, लेकिन इसके लिए बिना शर्त माफी मांगने और कई शर्तों का पालन करने का निर्देश दिया।

मामला फेसबुक पर राज्यपाल से संबंधित एक कार्टून-शैली की पोस्ट साझा करने से जुड़ा था। आरोप था कि पोस्ट के साथ असमिया भाषा में राज्यपाल के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी भी लिखी गई थी।

मूल पोस्ट 15 अप्रैल 2026 को सोशल मीडिया पर अपलोड की गई थी, जिसे बाद में अन्य फेसबुक अकाउंट्स से शेयर किया गया।

FIR में इन धाराओं के तहत मामला दर्ज:

मामले को लेकर रायपुर के सिविल लाइन थाने में FIR दर्ज की गई थी।

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 352, 353(1), 353(2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 के तहत कार्रवाई की थी।

इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने FIR और उससे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया।

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पहले भी मांगी थी माफी, फिर दाखिल किया शपथ पत्र:

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने बिना शर्त माफी मांगने और आपत्तिजनक सामग्री सोशल मीडिया से हटाने की इच्छा जताई।

इसके बाद 19 अगस्त 2026 को दोबारा माफी मांगते हुए हाईकोर्ट में शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया। राज्य सरकार ने भी निर्धारित शर्तों के पालन पर समझौते के लिए सहमति जताई।

हाईकोर्ट ने रखीं ये शर्तें:

हाईकोर्ट के सामने रखी गई शर्तों के अनुसार याचिकाकर्ताओं को –

  • बिना शर्त लिखित माफी मांगनी होगी।
  • जिस फेसबुक अकाउंट से पोस्ट शेयर की गई थी, उसी पर प्रमुखता से माफीनामा प्रकाशित करना होगा।
  • सभी डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से आपत्तिजनक सामग्री स्थायी रूप से हटानी होगी।
  • भविष्य में इस तरह का आचरण दोबारा नहीं करने का वचन देना होगा।
  • निर्दिष्ट समाचार पत्रों में भी माफी प्रकाशित करनी होगी।
  • असम में दर्ज संबंधित मामले को वापस लेने या बंद कराने के लिए आवश्यक कानूनी कदम उठाने होंगे।

कोर्ट ने क्यों दी राहत?

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने माना कि आरोप मुख्य रूप से सोशल मीडिया पोस्ट को साझा या दोबारा प्रकाशित करने से जुड़े थे।

याचिकाकर्ताओं पर किसी तरह की शारीरिक हिंसा करने या उनसे जुड़ी किसी वास्तविक हिंसक घटना का आरोप नहीं था।

कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि याचिकाकर्ताओं ने बिना शर्त माफी मांगी, आपत्तिजनक सामग्री हटाने की सहमति दी और भविष्य में ऐसा व्यवहार नहीं दोहराने का वादा किया।

राज्य सरकार ने भी निर्धारित शर्तों के आधार पर मामले को समाप्त करने पर सहमति जताई थी।

हाईकोर्ट ने माना कि माफी, पोस्ट हटाने और भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने जैसी शर्तों का उद्देश्य कथित पोस्ट के प्रभाव को कम करना और संवैधानिक पद की गरिमा की रक्षा करना है।

इन बदली परिस्थितियों में अदालत ने आपराधिक कार्यवाही जारी रखना उचित नहीं माना और FIR रद्द कर दी।

इस फैसले में हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर संवैधानिक पदों से जुड़े कंटेंट को लेकर जिम्मेदारी की अहमियत को रेखांकित किया है।

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