उत्तर अमेरिका में वैज्ञानिकों ने टाइगर स्वैलोटेल तितली (Tiger Swallowtail Butterfly) की एक नई प्रजाति की पहचान की है।
लंबे समय तक इसे केवल दो अलग-अलग प्रजातियों का संकर (Hybrid) माना जाता रहा,
लेकिन हालिया शोध से पता चला है कि यह वास्तव में एक स्वतंत्र और विशिष्ट प्रजाति है।
इस नई खोज ने तितलियों के विकास और जैव विविधता को समझने में नई दिशा प्रदान की है।
शोध में क्या सामने आया?
इस अध्ययन का नेतृत्व जूलियन डुपुइस (Julian Dupuis), बी. क्रिश्चियन श्मिट (B. Christian Schmidt), चार्ल्स जे. डेरोलर (Charles J. Derouler) और शी वांग (Xi Wang) ने किया।
शोधकर्ताओं ने Papilio glaucus और Papilio canadensis के संकर नमूनों का विस्तृत अध्ययन किया।
दोनों मूल प्रजातियों से तुलना करने पर वैज्ञानिकों ने पाया कि यह संकर समूह केवल मिश्रित लक्षणों वाला नहीं है,
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बल्कि इसमें कई ऐसे विशिष्ट गुण मौजूद हैं जो इसे एक अलग प्रजाति के रूप में स्थापित करते हैं।
150 वर्षों से मौजूद थे प्रमाण
शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने ग्रेट लेक्स के पूर्वी क्षेत्रों से एकत्रित नमूनों के साथ पुराने वैज्ञानिक रिकॉर्ड और साहित्य का भी अध्ययन किया।
जांच में पता चला कि इस प्रकार की तितलियों का उल्लेख लगभग 150 वर्ष पहले से मिलता रहा है।
इतने लंबे समय तक इनका एक बड़े भौगोलिक क्षेत्र में लगातार पाया जाना इस बात का मजबूत संकेत माना गया कि
यह केवल अस्थायी संकर नहीं, बल्कि एक स्थायी और अलग प्रजाति है।
नई प्रजाति की प्रमुख विशेषताएं
शोधकर्ताओं ने इस नई तितली में कई ऐसे रूपात्मक (Morphological) और जैविक लक्षण पाए जो इसे अन्य दोनों प्रजातियों से अलग बनाते हैं।
मुख्य विशेषताएं:
- विशिष्ट शारीरिक बनावट और पंखों के पैटर्न।
- डायपॉज (Diapause) के बाद विकास की अवधि अधिक लंबी।
- अन्य टाइगर स्वैलोटेल प्रजातियों की तुलना में देर से उड़ान भरने की क्षमता।
- बड़े भौगोलिक क्षेत्र में स्थायी उपस्थिति।
नई प्रजाति का नाम क्या रखा गया?
वैज्ञानिकों ने इस नई प्रजाति का नाम Papilio solstitius रखा है।
यह नाम इसकी मध्य गर्मियों (Mid-Summer) में उड़ान भरने की विशेषता को दर्शाता है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि उपलब्ध आनुवंशिक, रूपात्मक और जैविक साक्ष्य इसे एक स्वतंत्र प्रजाति के रूप में मान्यता देने के लिए पर्याप्त हैं।
भारत से क्या है संबंध?
इस नई खोज का संबंध भारत में दर्ज एक अन्य स्वैलोटेल तितली से भी जुड़ता है।
सितंबर 2021 में एक दुर्लभ स्वैलोटेल तितली, जिसे पहले केवल म्यांमार, दक्षिणी चीन और वियतनाम में पाया जाता था, पहली बार भारत में दर्ज की गई।
इससे यह संकेत मिलता है कि एशिया और उत्तर अमेरिका की स्वैलोटेल तितलियों पर अभी भी व्यापक शोध की आवश्यकता है और भविष्य में नई प्रजातियों की खोज की संभावना बनी हुई है।
जैव विविधता के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज?
नई प्रजाति की पहचान यह दर्शाती है कि संकर प्रजातियां (Hybrid Species) भी समय के साथ स्वतंत्र विकास करके नई प्रजातियों का रूप ले सकती हैं।
यह खोज विकासवाद (Evolution), आनुवंशिकी (Genetics) और जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
निष्कर्ष
उत्तर अमेरिका में Papilio solstitius की खोज तितलियों के विकास और वर्गीकरण के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
लगभग 150 वर्षों से दर्ज किए जा रहे नमूनों के विस्तृत विश्लेषण ने साबित किया कि यह केवल संकर तितली नहीं,
बल्कि एक अलग और स्थायी प्रजाति है। वहीं भारत में संबंधित स्वैलोटेल तितली की मौजूदगी इस समूह पर भविष्य में और अधिक शोध की संभावनाओं को मजबूत करती है।