सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस महीने पड़ने वाले सोमवार को शिव भक्त व्रत रखते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना करते हैं।
सावन का अंतिम सोमवार विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह सावन मास की सोमवार पूजा का अंतिम अवसर होता है।
मान्यता है कि सावन में भगवान शिव की आराधना करने से भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
अंतिम सोमवार को मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है और भक्त बेलपत्र, फूल, फल तथा जल अर्पित करते हैं।
जलाभिषेक का क्या है पौराणिक महत्व?
हिंदू धार्मिक मान्यताओं में भगवान शिव को जल अर्पित करने की परंपरा बहुत प्राचीन मानी जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान जब हलाहल विष निकला, तब भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए उसे अपने कंठ में धारण किया।
विष के प्रभाव को शांत करने के लिए देवताओं और अन्य शक्तियों ने भगवान शिव पर जल अर्पित किया।इसी मान्यता से जुड़ी परंपरा के अनुसार सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाना शुभ माना जाता है।
भक्त श्रद्धा के साथ जलाभिषेक कर भगवान शिव से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
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सावन सोमवार की पूजा में क्या चढ़ाया जाता है?
सावन सोमवार पर भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान शिव को कई चीजें अर्पित करते हैं।
इनमें प्रमुख रूप से—
– जल
– दूध
– बेलपत्र
– सफेद फूल
– फल
– भस्म
– धतूरा
धार्मिक मान्यताओं में बेलपत्र को भगवान शिव का प्रिय माना गया है। हालांकि पूजा में सबसे महत्वपूर्ण चीज श्रद्धा और भक्ति मानी जाती है।
अंतिम सोमवार पर क्या करें?
सावन के अंतिम सोमवार को सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान शिव का स्मरण किया जाता है।
इसके बाद शिवलिंग पर जल अर्पित कर बेलपत्र और फूल चढ़ाए जाते हैं। भक्त भगवान शिव की पूजा के साथ शिव मंत्र या ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप भी करते हैं।
पंचाक्षरी मंत्र:
ॐ नमः शिवाय
अर्थ: मैं भगवान शिव को प्रणाम करता हूँ।
महामृत्युंजय मंत्र:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् |
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ||
अर्थ: हम त्रिनेत्र भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो हर महक और जीवन को बढ़ाते हैं। हमें भी मृत्यु और बंधन से मुक्त करें।
शिव गायत्री मंत्र:
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ||
अर्थ: हम महादेव को जानते हैं और उनका ध्यान करते हैं। रुद्र देवता हमें अच्छी बुद्धि और सही राह दिखाएं।
इसके बाद भगवान शिव से परिवार की सुख-शांति और मंगल की प्रार्थना की जाती है।
धार्मिक मान्यताओं में सावन का महत्व:
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष महीना है। माना जाता है कि इस दौरान शिव पूजा करने से मन को शांति मिलती है और भक्त भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं।
अंतिम सोमवार भगवान शिव के भक्तों के लिए श्रद्धा और आस्था का विशेष दिन है। इस दिन जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पित करने और शिव आराधना की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
समुद्र मंथन और भगवान शिव द्वारा विष धारण करने से जुड़ी पौराणिक कथा जलाभिषेक की परंपरा को विशेष धार्मिक संदर्भ देती है।