रायपुर: छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले से जुड़े मामले में सरकारी शराब दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों के नाम पर करोड़ों रुपये के कथित अतिरिक्त भुगतान का मामला सामने आया है।
जांच एजेंसी के अनुसार, पांच मैनपावर कंपनियों को वर्ष 2019 से 2023 के बीच ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों के काम के नाम पर करीब 182.98 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। आरोप है कि इस रकम का लाभ संबंधित कर्मचारियों को नहीं मिला।
मामले में छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) के पूर्व प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी समेत कई लोगों की भूमिका जांच के दायरे में है।
14 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, EOW-ACB ने अरुणपति त्रिपाठी और मैनपावर एजेंसी संचालक बीआर लोहिया के खिलाफ पूरक चालान भी पेश किया है।
कर्मचारियों के नाम पर हुआ करोड़ों का भुगतान
जांच के मुताबिक, सरकारी शराब दुकानों में कर्मचारियों की आपूर्ति करने वाली पांच एजेंसियों को ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों के काम के भुगतान के नाम पर रकम दी गई थी।
नियम के अनुसार, कंपनियों को पहले कर्मचारियों को यह राशि देनी थी और उसके बाद CSMCL से भुगतान लेना था।
हालांकि, जांच एजेंसी का आरोप है कि कंपनियों ने कर्मचारियों को अतिरिक्त राशि दिए बिना या वास्तविक भुगतान से अधिक रकम दर्शाकर बिल प्रस्तुत किए।
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इन बिलों के आधार पर निगम से भुगतान प्राप्त किया गया।
शराब दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों ने अपने बयानों में कथित तौर पर बताया कि उन्हें नियमित मासिक वेतन तो मिलता था, लेकिन उनके नाम पर ओवरटाइम, बोनस और अतिरिक्त दिनों के काम के लिए दिखाई गई राशि नहीं मिली।
इन पांच कंपनियों पर लगे आरोप
जांच में जिन पांच मैनपावर एजेंसियों के नाम सामने आए हैं, वे हैं:
- सुमीत फैसिलिटीज लिमिटेड
- प्राइमवन वर्कफोर्स प्राइवेट लिमिटेड
- ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस लिमिटेड
- अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड
- ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड
जांच एजेंसी के अनुसार, इन एजेंसियों को कुल 182.98 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। आरोप है कि कर्मचारियों को उनका बकाया दिए बिना भुगतान प्राप्त किया गया, जिससे सरकारी खजाने को आर्थिक नुकसान पहुंचा।
पूर्व MD अरुणपति त्रिपाठी की भूमिका भी जांच के दायरे में
अरुणपति त्रिपाठी 9 मई 2019 से 13 मई 2023 तक CSMCL के प्रबंध संचालक रहे।
जांच एजेंसी के अनुसार, उनके कार्यकाल के दौरान पांचों एजेंसियों को ओवरटाइम, बोनस, चार अतिरिक्त दिनों के काम और संबंधित सेवा शुल्क के रूप में लगभग 152.40 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया।
EOW-ACB की जांच में आरोप लगाया गया है कि इन भुगतानों से जुड़े बिलों को मंजूरी देने और कथित अनियमितताओं में संबंधित अधिकारियों एवं एजेंसी संचालकों की भूमिका की जांच की जा रही है।
42 आरोपियों का मामला, जांच जारी
शराब घोटाले से जुड़े इस मामले में कुल 42 आरोपियों का उल्लेख सामने आया है।
वहीं, 14 अक्टूबर को आई रिपोर्ट में अरुणपति त्रिपाठी और बीआर लोहिया के खिलाफ पूरक चालान दाखिल किए जाने की जानकारी दी गई है।
मामले में आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया और जांच जारी है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि जांच एजेंसी द्वारा लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्णय अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला सरकारी शराब दुकानों में कर्मचारियों की आपूर्ति करने वाली कंपनियों को किए गए अतिरिक्त भुगतान से जुड़ा है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि कर्मचारियों के नाम पर ओवरटाइम, बोनस और अतिरिक्त कार्यदिवसों की रकम के बिल प्रस्तुत किए गए,
लेकिन संबंधित कर्मचारियों को उसका भुगतान नहीं हुआ। अब जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि अनियमितताओं में किन लोगों की क्या भूमिका थी और सरकारी धन का इस्तेमाल किस तरह किया गया।