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सिरपुर – छत्तीसगढ़ की प्राचीन बौद्ध नगरी

17 February 2026 Updated: 20 February 2026
KharunTimes

छत्तीसगढ़ की धरती केवल जंगल, जलप्रपात और खनिजों के लिए नहीं जानी जाती, बल्कि यह भूमि भारत की प्राचीन सभ्यताओं और धार्मिक समन्वय की साक्षी भी रही है। इसी गौरवशाली अतीत का एक अमूल्य अध्याय है सिरपुर।


🔹 प्राचीन नाम और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

सिरपुर का प्राचीन नाम श्रीपुर था। यह 6वीं से 8वीं शताब्दी के दौरान दक्षिण कोसल राज्य की राजधानी रहा। उस समय यह नगर शिक्षा, धर्म, व्यापार और कला का प्रमुख केंद्र था।

चीनी यात्री Xuanzang (ह्वेनसांग) ने भी अपने यात्रा विवरण में इस क्षेत्र के वैभव का उल्लेख किया है, जिससे सिरपुर के अंतरराष्ट्रीय महत्व का अनुमान लगाया जा सकता है।

🔹 बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र

सिरपुर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह बौद्ध धर्म का एक समृद्ध केंद्र रहा।

खुदाई में यहाँ कई बौद्ध विहार, स्तूप और बुद्ध प्रतिमाएँ मिली हैं।

इन अवशेषों से स्पष्ट होता है कि यहाँ दूर-दूर से बौद्ध भिक्षु अध्ययन और साधना के लिए आते थे।

यह तथ्य छत्तीसगढ़ को केवल स्थानीय नहीं, बल्कि एशियाई बौद्ध नेटवर्क से जोड़ता है।

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🔹 लक्ष्मण मंदिर –

ईंटों में गढ़ा इतिहाससिरपुर का लक्ष्मण मंदिर भारतीय स्थापत्य इतिहास में एक विशेष स्थान रखता है।

यह मंदिर 7वीं शताब्दी में रानी वासटा देवी द्वारा निर्मित कराया गया था।यह मंदिर इसलिए अनोखा है क्योंकि:

• यह ईंटों से बना हुआ प्राचीन मंदिर है

• इसकी शिल्पकला आज भी स्पष्ट दिखाई देती है

• विष्णु को समर्पित होते हुए भी इसमें शैव और बौद्ध प्रभाव दिखता हैयह मंदिर दर्शाता है कि उस युग में धार्मिक सहिष्णुता कितनी गहरी थी।

🔹 शैव, वैष्णव और बौद्ध परंपराओं का संगम

सिरपुर केवल बौद्ध स्थल नहीं था, यहाँ:

• शिव मंदिर

• विष्णु मंदिर

• बौद्ध विहारसभी एक ही क्षेत्र में मौजूद थे।

यह भारत के उन गिने-चुने स्थलों में से है जहाँ तीन प्रमुख धार्मिक धाराएँ साथ-साथ विकसित हुईं।

🔹 खुदाई और आधुनिक खोजें

1950 के बाद से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा यहाँ कई चरणों में खुदाई की गई।

खुदाई में प्राप्त:

• बुद्ध की दुर्लभ प्रतिमाएँ

• शिलालेख

• मठों के अवशेषइन सबने सिरपुर को राष्ट्रीय पुरातात्विक धरोहर का दर्जा दिलाया।

🔹 महानदी और सिरपुर

महानदी के तट पर स्थित होने के कारण सिरपुर व्यापार और आवागमन का भी केंद्र था।

नदी मार्ग से यहाँ:

• विद्वान आते थे

• व्यापारी पहुँचते थे

• संस्कृति का आदान-प्रदान होता था

यही कारण है कि सिरपुर केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक राजधानी भी था।

🔹 आज का सिरपुर

आज सिरपुर एक शांत ऐतिहासिक स्थल है, लेकिन इसके अवशेष आज भी उस काल की कहानी कहते हैं जब छत्तीसगढ़ ज्ञान और धर्म का केंद्र था।

हर वर्ष यहाँ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटक, शोधकर्ता और इतिहास प्रेमी आते हैं।

🔹 पुरखा के विरासत

सिरपुर हमें यह सिखाता है कि:

• छत्तीसगढ़ की पहचान नई नहीं है

• यहाँ की जड़ें हजारों साल पुरानी हैं

• यह भूमि विचारों की भूमि रही है

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Laxya Sahu
About the author

Laxya Sahu

लक्ष्य साहू मूलतः नया रायपुर के अभनपुर के निवासी हैं। वे खारुन टाइम्स के प्रधान संपादक हैं तथा सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर लेखन करते हैं । उनकी कृति "चार समाज की बात" समकालीन सामाजिक सरोकारों पर आधारित है । छात्र जीवन से ही वे सामाजिक एवं छात्र हित के मुद्दों से जुड़े रहे हैं , इस दौरान उन्होंने अनेक छात्र एवं जनहित संबंधी आंदोलनों को खड़ा कर उनका नेतृत्व किया तथा लगभग आठ वर्षों तक विद्यार्थियों के विकास के उद्देश्य से शैक्षणिक, सामाजिक और नेतृत्व विकास कार्यक्रमों का आयोजन एवं संचालन किया। वर्तमान में वे पत्रकारिता और साहित्य के माध्यम से सामाजिक, राजनीतिक और जनसरोकारों से जुड़े विषयों पर नियमित कार्य कर रहे हैं।

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