धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी में घर के भीतर आयोजित प्रार्थना सभा को लेकर विवाद बढ़ गया। टिकरापारा इलाके में प्रार्थना सभा के विरोध में हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन किया।
इसके बाद भीम आर्मी और ईसाई पक्ष से जुड़े लोगों की ओर से भी विरोध दर्ज कराया गया। विवाद के दौरान पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया।
हिंदू संगठनों ने प्रार्थना सभा की आड़ में धर्मांतरण कराए जाने का आरोप लगाया।
वहीं, ईसाई पक्ष का कहना है कि प्रार्थना सभा में शामिल होना किसी व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा विषय है और किसी को केवल प्रार्थना सभा में जाने से नहीं रोका जाना चाहिए। दोनों पक्षों के आमने-सामने आने से इलाके में तनाव की स्थिति बनी रही।
प्रार्थना सभा को लेकर क्यों हुआ विवाद?
मामला धमतरी के टिकरापारा क्षेत्र में एक निजी मकान में आयोजित प्रार्थना सभा से जुड़ा है। हिंदू जागरण मंच और सर्व हिंदू समाज से जुड़े लोगों ने सभा का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि यहां धर्मांतरण की गतिविधियां हो सकती हैं।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से प्रार्थना सभाओं की जांच कराने और धर्मांतरण से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों से बातचीत की।
सभा में जाने के लिए अनुमति जरूरी नहीं:

विवाद के बीच भीम आर्मी ने प्रार्थना सभा में अन्य धर्मों के लोगों के प्रवेश को लेकर प्रशासन के सामने अपना पक्ष रखा।
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22 सितंबर को भीम आर्मी भारत एकता मिशन, धमतरी ने कलेक्टर को ज्ञापन देकर कहा था कि किसी व्यक्ति के केवल प्रार्थना सभा में शामिल होने को धर्मांतरण से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।ईसाई समुदाय की ओर से भी धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला दिया गया।
क्रिश्चियन फोरम के महासचिव डॉ. डायमंड फिलस ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 25 धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। उनका कहना है कि प्रार्थना सभा में आने वाला व्यक्ति अपनी इच्छा से आता है और उस पर किसी तरह का दबाव नहीं डाला जाता।
40 चर्चों में लगाए गए प्रवेश संबंधी सूचना बोर्ड:
विवाद के बीच धमतरी जिले के करीब 40 चर्चों और प्रार्थना सभा स्थलों पर प्रवेश संबंधी सूचना बोर्ड लगाए जाने की रिपोर्ट सामने आई है।
क्रिश्चियन फोरम के अनुसार यह कदम विवाद और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बाद उठाया गया। हालांकि प्रशासन ने कुछ दावों और बताए गए आवेदनों की संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है।
पुलिस और प्रशासन ने संभाली स्थिति:
विरोध की सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने दोनों पक्षों को समझाइश देकर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की।
प्रदर्शन के दौरान मुख्य मार्ग पर यातायात भी प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।
हाईकोर्ट की टिप्पणी भी चर्चा में:
इसी वर्ष छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक मामले में कहा था कि अपने घर के भीतर प्रार्थना सभा आयोजित करने पर सामान्य तौर पर किसी अधिकारी से पहले से अनुमति लेने की कानूनी आवश्यकता नहीं है, बशर्ते कोई कानून न टूटे।
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि ध्वनि प्रदूषण या कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा होने पर संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल धमतरी में प्रार्थना सभा, धार्मिक स्वतंत्रता और धर्मांतरण के आरोपों को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद बना हुआ है। प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।