रायपुर | राजकुमार कॉलेज में करीब 18 साल तक सेवाएं देने वाली शिक्षिका को नौकरी से हटाने के मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने शिक्षिका की बर्खास्तगी को अवैधानिक मानते हुए कॉलेज की अपील खारिज कर दी।
साथ ही शिक्षिका को सेवा से जुड़े आर्थिक लाभ और पूरी सैलरी देने का आदेश बरकरार रखा है। बकाया राशि पर 9% वार्षिक ब्याज देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
18 साल की सेवा के बाद हटाया गया था:मामला राजकुमार कॉलेज से जुड़ा है, जहां शिक्षिका ने लंबे समय तक सेवा दी थी। करीब 18 वर्ष की सेवा के बाद उन्हें नौकरी से हटा दिया गया।
शिक्षिका ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए न्यायालय की शरण ली थी। मामले में पहले दिए गए आदेश के खिलाफ कॉलेज की ओर से अपील की गई। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद कॉलेज की दलीलों को स्वीकार नहीं किया और अपील खारिज कर दी।
कोर्ट ने बर्खास्तगी को माना अवैधानिक:
हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों और रिकॉर्ड पर विचार करते हुए शिक्षिका को सेवा से हटाने की कार्रवाई को कानून के अनुरूप नहीं माना।
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें
छत्तीसगढ़ की ब्रेकिंग न्यूज़, ग्राउंड रिपोर्ट और महत्वपूर्ण अपडेट सबसे पहले सीधे अपने WhatsApp पर प्राप्त करें।
कोर्ट के फैसले से शिक्षिका को बड़ी राहत मिली है।
अदालत ने कहा कि लंबे समय तक सेवा देने वाली कर्मचारी को हटाने की प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के अनुरूप होनी चाहिए।
इस मामले में बर्खास्तगी को वैध नहीं माना गया।
पूरी सैलरी और 9% ब्याज देने का आदेश:
फैसले के अनुसार शिक्षिका को उनके सेवा संबंधी बकाया लाभ देने होंगे। इसके साथ ही बकाया राशि पर 9% वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
इस आदेश से कॉलेज पर शिक्षिका को आर्थिक लाभ देने की जिम्मेदारी तय हुई है।
कॉलेज की अपील खारिज होने के बाद पहले के राहत संबंधी आदेश को बरकरार रखा गया है।
18 साल की नौकरी के बाद कार्रवाई पर कोर्ट का अहम संदेश:
यह फैसला लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों के सेवा अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाईकोर्ट के आदेश से यह स्पष्ट होता है कि किसी कर्मचारी की सेवा समाप्त करने की कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही की जानी चाहिए।