जिला धमतरी के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र नगरी में स्थित सुखराम नागे महाविद्यालय एक बार फिर सुर्खियों में है।
कॉलेज में आयोजित एक उत्सव कार्यक्रम के बाद छात्रों का गुस्सा खुलकर सामने आया है।
आरोप है कि कार्यक्रम छात्रों के लिए आयोजित किया गया था, लेकिन भोजन वितरण के दौरान कई छात्र खाली हाथ लौट गए।
छात्रों का दर्द: “फीस हमारी, पर हक़ नहीं?”
छात्रों का कहना है कि वे सालभर मेहनत की कमाई से फीस भरते हैं और 4–5 वर्षों तक पढ़ाई करते हैं।
ऐसे में जब कॉलेज में कार्यक्रम होता है, तो वह उनके लिए सम्मान और सहभागिता का अवसर होता है।
लेकिन आरोप है कि कार्यक्रम में बाहरी अतिथियों और परिचितों को प्राथमिकता दी गई, जिससे कई छात्र भोजन से वंचित रह गए।
प्रशासन पर सवाल
यदि यह आरोप सही हैं, तो यह केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला है।
शैक्षणिक संस्थान में छात्रों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, न कि औपचारिक दिखावे को।
जांच और पारदर्शिता की मांग
छात्रों ने निष्पक्ष जांच और भविष्य में पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
अब देखना यह होगा कि कॉलेज प्रशासन इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाता है।