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रायपुर का नालन्दा परिसर: पढ़ने की जगह या नेताओं का अड्डा?

13 March 2026 Updated: 30 July 2026
KharunTimes

रायपुर – नालन्दा परिसर आज हजारों छात्रों के लिए उम्मीद और संघर्ष की पहचान बन चुका है।

यहाँ दूर-दराज़ से आए छात्र अपने सपनों को पूरा करने के लिए दिन-रात पढ़ाई करते हैं।

लेकिन इस ज्ञान के केंद्र के बाहर का माहौल अब कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

इन जगहों पर अक्सर बड़े नेता और छात्र नेता बैठकर चर्चा करते हैं और मीटिंग होती रहती है।

तथाकथित नेताओं ने नालन्दा परिसर को अपना ठेक समझ कर रखा है जहां अधिकांश समय अपशब्दों का उपयोग भी करते रहते हैं।

परिसर के बाहर सामने जहाँ छात्रों के लिए सस्ती कैंटीन या जरूरी सुविधाएँ होनी चाहिए थीं, वहाँ आज कई महंगे कैफे और रेस्टोरेंट दिखाई देते हैं।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि यहाँ पढ़ने वाला गरीब छात्र आखिर खाना कहाँ खाए?

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दुकानदारों ने क्या कहा

इस मुद्दे को समझने के लिए जब हमने दुकानदारों से बात की तो उनका कहना था कि दुकानों का किराया बहुत ज्यादा है।

ज्यादा किराया होने की वजह से वे सस्ती दरों पर खाना या नाश्ता उपलब्ध नहीं करा पाते।

दुकानदारों के मुताबिक, अगर वे दाम कम रखते हैं तो उनके लिए दुकान चलाना मुश्किल हो जाता है।

इसलिए मजबूरी में उन्हें कीमतें बढ़ानी पड़ती हैं।

नालन्दा परिसर निशुल्क या कमाई का साधन ?

जिस जगह पर विद्यार्थियों के आवश्यकता की सामग्री मिलनी चाहिए थी,

जहां मेडिकल खुलने वाले थे वहां अब केवल महंगे कैफे और रेस्तरां ही दिखते हैं।

यहाँ से एक और बड़ा सवाल सामने आता है –

अगर किराया इतना ज्यादा है तो क्या प्रशासन ने कभी यह सोचा कि छात्रों के लिए कोई सब्सिडी या सस्ती सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है?

क्या यहाँ दुकानों में लो-कॉस्ट मेन्यू लागू नहीं किया जा सकता था,

जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के छात्र भी आसानी से खाना खा सकें?

सुविधाओं की भी कमी

मामला सिर्फ महंगे खाने का ही नहीं है।

अगर दुकानों से अच्छा किराया लिया जा रहा है तो परिसर के आसपास की व्यवस्था भी बेहतर होनी चाहिए।

लेकिन कई जगहों पर गंदगी दिखाई देती है और बैठने की उचित व्यवस्था भी नहीं है।

साफ-सफाई और मूलभूत सुविधाओं की कमी भी देखने को मिलती है।

नालन्दा परिसर का सबसे बड़ा सवाल

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि दुकानों से लिया जाने वाला यह किराया और पैसा आखिर जा कहाँ रहा है?

ज्ञान के इस केंद्र के बाहर उठ रहे ये सवाल अब पूरे शहर में चर्चा का विषय बनते जा रहे हैं।

छात्र और स्थानीय लोग अब उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले समय में यहाँ पढ़ने वाले छात्रों के लिए सस्ती और बेहतर सुविधाओं पर ध्यान दिया जाएगा।

यह भी देखें –

रायपुर बस स्टैंड पार्किंग: “छुट्टे” के नाम पर लाखों की वसूली https://kharuntimes.com/raipur-parking-extra-charges/

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Laxya Sahu
About the author

Laxya Sahu

लक्ष्य साहू मूलतः नया रायपुर के अभनपुर के निवासी हैं। वे खारुन टाइम्स के प्रधान संपादक हैं तथा सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर लेखन करते हैं । उनकी कृति "चार समाज की बात" समकालीन सामाजिक सरोकारों पर आधारित है । छात्र जीवन से ही वे सामाजिक एवं छात्र हित के मुद्दों से जुड़े रहे हैं , इस दौरान उन्होंने अनेक छात्र एवं जनहित संबंधी आंदोलनों को खड़ा कर उनका नेतृत्व किया तथा लगभग आठ वर्षों तक विद्यार्थियों के विकास के उद्देश्य से शैक्षणिक, सामाजिक और नेतृत्व विकास कार्यक्रमों का आयोजन एवं संचालन किया। वर्तमान में वे पत्रकारिता और साहित्य के माध्यम से सामाजिक, राजनीतिक और जनसरोकारों से जुड़े विषयों पर नियमित कार्य कर रहे हैं।

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