खारुन नदी संकट में: प्रदूषण, जलकुंभी और मरती मछलियाँ

रायपुर – छत्तीसगढ़ की प्रमुख नदियों में शामिल खारुन नदी आज प्रदूषण के कारण गंभीर संकट में है। कभी साफ और जीवनदायिनी रही यह नदी अब अपनी पहचान खोती जा रही है।

पानी की गुणवत्ता इतनी खराब हो चुकी है कि अब यह पीने योग्य नहीं रहा, जो खारून नदी प्रदूषण की गंभीरता को दिखाता है।



खारुन नदी में मर रही हैं मछलियाँ

खारून नदी प्रदूषण का सबसे बड़ा असर जलीय जीवों पर दिख रहा है।

नदी में ऑक्सीजन की कमी के कारण:मछलियाँ लगातार मर रही हैं

जलीय जीवन खत्म हो रहा हैयह स्थिति बताती है कि खारून नदी प्रदूषण ने पारिस्थितिकी तंत्र को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।

जलकुंभी

खारून नदी में जलकुंभी का तेजी से फैलना भी खारून नदी प्रदूषण का एक बड़ा कारण और परिणाम दोनों है।जलकुंभी पानी को ढक लेती है।

ऑक्सीजन स्तर और कम करती हैनदी के बहाव को रोकती हैइससे खारून नदी प्रदूषण और तेजी से बढ़ रहा है।

गंदे नालों से बढ़ रहा प्रदूषण

शहरों का गंदा पानी सीधे नदी में छोड़ा जा रहा है, जिससे खारून नदी प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।

बिना ट्रीटमेंट का सीवेज

औद्योगिक कचरा

इन कारणों से खारून नदी अब धीरे-धीरे नाले में बदलती जा रही है।

योजनाएं बहुत, लेकिन प्रदूषण जस का तस

हर साल:नदी की आरती होती है ,

सफाई के दावे किए जाते हैं ,

करोड़ों की योजनाएं बनती हैं ,

लेकिन इसके बावजूद खारून नदी प्रदूषण में कोई खास कमी नहीं आई है।

निर्माण कार्य

नदी पर बढ़ते निर्माण कार्य भी खारून नदी प्रदूषण को प्रभावित कर रहे हैं ।

पुल और अन्य प्रोजेक्ट्स नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित कर रहे हैं।

निष्कर्ष: प्रदूषण बना बड़ा खतरा

ग्राउंड रिपोर्ट साफ दिखाती है कि खारून नदी अब तेजी से नाले में बदल रही है।

अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो खारून नदी प्रदूषण भविष्य में बड़े जल संकट का कारण बन सकता है।

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