
कभी जहां पुन्नी मेले में पैर रखने की जगह नहीं मिलती थी, वहीं इस बार राजिम पुन्नी मेला 2026 में सन्नाटा नजर आ रहा है।
खारुन टाइम्स की टीम जब चौबेबांधा स्थित नए मेला स्थल पर पहुँची तो रौनक की जगह खाली गलियारे और ग्राहकों का इंतजार करते दुकानदार दिखाई दिए।
नदी तट से मेला हटाकर चौबेबांधा शिफ्ट करने के फैसले ने पूरे आयोजन की तस्वीर बदल दी है।
राजिम पुन्नी मेला 2026: क्यों सूना पड़ा मेला ? देखें रिपोर्ट
पहले व्यवस्था ऐसी थी कि श्रद्धालु राजीवलोचन मंदिर में दर्शन करने के बाद पैदल ही मेला क्षेत्र से गुजरते हुए कुलेश्वर महादेव तक पहुँच जाते थे।
आस्था और व्यापार का प्रवाह एक साथ चलता था , इस बार मेला स्थल अलग दिशा में स्थापित किया गया है।
मंदिर और मेले का सीधा संपर्क टूट गया है।
हालांकि इसका असर साफ दिख रहा है न पहले जैसी भीड़, न वैसा उत्साह।
मेला स्थल पर मौजूद कई व्यापारियों ने कैमरे पर अपनी नाराज़गी जाहिर की,
उनका कहना है कि स्टॉल आवंटन के नाम पर प्रति व्यापारी एक हजार रुपये लिए गए,
लेकिन जिस स्थान पर दुकान मिली है वहाँ ग्राहक पहुँच ही नहीं रहे।
अंदरूनी हिस्सों में बनी दुकानों तक जाने का स्पष्ट रास्ता नहीं दिखता।
एक व्यापारी ने कहा, “तीन दिन हो गए, बोहनी तक नहीं हुई। जितना किराया और खर्च लगा है, वह भी नहीं निकल रहा।”
वर्तमान स्थिति –
कुछ व्यापारियों ने यह भी आरोप लगाया कि सामने की पंक्ति के प्लॉट प्रभावशाली लोगों के माध्यम से दस से बारह हजार रुपये में दिए गए।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन रिकॉर्डेड बयानों में व्यापारी खुलकर यह दावा करते नजर आए।
मेला परिसर में घूमते समय यह स्पष्ट दिखा कि बाहरी हिस्से में भीड़ सीमित है और अंदर की दुकानों तक लोगों का रुख कम है।
कई दुकानदार खाली बैठे मिले।
बहुत सारे व्यापारी अपने स्टाल छोड़ के जा चुके है और कुछ ने तो सामान समेटने की तैयारी भी शुरू कर दी है।
उनका कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो घाटा उठाकर वापस लौटना पड़ेगा।
मंदिर क्षेत्र के पास एक और घटना ने सवाल खड़े किए।
“VIP मार्ग” का कारण बता कर खिलौने बेच रहा एक गरीब परिवार प्रशासनिक कर्मचारियों द्वारा हटाया जा रहा था।
परिवार की महिला ने कहा, “हम रोज यहीं बैठते हैं, आज हटाया जा रहा है। कमाई का यही सहारा है।”
जब पूरा मेला ही अपेक्षा से कम भीड़ वाला है, तब इस कार्रवाई को लेकर भी चर्चा हो रही है।
राजिम पुन्नी मेला 2026 में व्यापार क्यों ठप पड़ा ?
स्थानीय लोगों का कहना है कि मेला स्थल परिवर्तन की जानकारी और पहुँच व्यवस्था स्पष्ट नहीं रही।
चौबेबांधा तक जाने के मार्ग और परिवहन को लेकर भी लोगों में भ्रम है।
कुछ का मानना है कि यदि मंदिर और मेला एक साथ जुड़े रहते तो भीड़ स्वाभाविक रूप से अधिक होती।
राजिम पुन्नी मेला 2026 केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इस बार चौबेबांधा शिफ्टिंग के बाद जो दृश्य सामने आया है,उसने व्यापारियों और आम लोगों दोनों को निराश किया है।
अब सवाल यह है कि क्या आयोजन में समन्वय की कमी रही या योजना में ही त्रुटि थी।