कानून-व्यवस्था पर सवाल, असुरक्षित होती जनता और जवाबदेही से दूर प्रशासन
छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ता अपराध अब एक सामान्य खबर नहीं, बल्कि राज्य की गंभीर समस्या बन चुका है। हत्या, लूट, चोरी, अवैध नशा कारोबार और महिलाओं के खिलाफ अपराधों की बढ़ती घटनाएँ सरकार के सुशासन के दावों को खोखला साबित कर रही हैं। राजधानी से लेकर दूरस्थ ग्रामीण इलाकों तक अपराधियों के हौसले बुलंद हैं, जबकि आम नागरिक भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर है।
राज्य में पुलिस बल की कमी, संसाधनों का अभाव और कई मामलों में ढीली कार्रवाई कानून-व्यवस्था को कमजोर कर रही है। कई अपराधों में समय पर जांच न होना और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी न होना सवाल खड़े करता है कि आखिर प्रशासन किस दबाव में काम कर रहा है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हालात और भी चिंताजनक हैं, जहाँ अपराध और प्रशासनिक निष्क्रियता दोनों साथ-साथ चल रही हैं।
सरकार विकास योजनाओं और बड़े-बड़े दावों में व्यस्त नजर आती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। जनता अब भाषण और आश्वासन नहीं, बल्कि सख्त कार्रवाई, मजबूत पुलिस व्यवस्था और जवाबदेह प्रशासन चाहती है। अगर हालात नहीं बदले, तो बढ़ता अपराध छत्तीसगढ़ के भविष्य पर गहरा असर डाल सकता है।